28 मार्च 2015

अधुरा सा प्यार मेरा - पलक


डरा सा बैठा है सीने में कहीं
एक ख्याल तेरा
फिर कभी यूँ आंसुओं में बह जाता है
अरमान मेरा
चुप है आज जिन्दगी मेरी
चुप सा है आज
आसमान मेरा
ढूढती फिरती हूँ
बीते हुए लम्हों में तुझे
आँखों में आज भी है
इन्तेजार तेरा
ऐ जाने वाले एक बार तो समझ
ये अधुरा सा प्यार मेरा.....!!

लेखक परिचय - पलक

13 मार्च 2015

मेरी जिंदगी की झील में - संजय भास्कर

चित्र गूगल से साभार 
उन्होंने कहा सबसे प्यार करो
जिन्दगी खुद ही
प्यारी हो जाएगी
मैंने कोशिश की पर
कर नहीं पाया
हर किसी को प्यार
 दे नहीं पाया
उसने भी मेरा साथ न दिया
चाहा न उसने मुझे
बस देखती रही
मेरी जिंदगी से
वो इस तरह खेलती रही ,
न उतरी वो कभी
मेरी जिंदगी की झील में ,
बस किनारे पर बैठ कर पत्थर
फेकती रही ... !!

-- संजय भास्कर