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20 जून 2014

हो जाए ऐसा खुदा न खास्ता तो -- वंदना सिंह


हो जाए ऐसा खुदा न खास्ता तो 
याद आये भूला हुआ रास्ता तो 

नींदों में हमें है चलने कि आदत 
अगर शिद्दत से वो पुकारता तो

खामोशियों को जुबां हमने जाना 
कयामत ही होती गर बोलता तो

होता यूँ के टूटते बस भरम ही 
गर जाते में उसको टोकता तो

उसी कि नजर का जवाब हम थे 
आईने में खुद को निहारता तो

मर के भी मैं जी उठूंगा शायद 
दिया अपना जो उसने वास्ता तो




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