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28 मार्च 2015

अधुरा सा प्यार मेरा - पलक


डरा सा बैठा है सीने में कहीं
एक ख्याल तेरा
फिर कभी यूँ आंसुओं में बह जाता है
अरमान मेरा
चुप है आज जिन्दगी मेरी
चुप सा है आज
आसमान मेरा
ढूढती फिरती हूँ
बीते हुए लम्हों में तुझे
आँखों में आज भी है
इन्तेजार तेरा
ऐ जाने वाले एक बार तो समझ
ये अधुरा सा प्यार मेरा.....!!

लेखक परिचय - पलक

8 टिप्‍पणियां:

  1. अनुपम भाव लिये बेहतरीन प्रस्‍तुति

    जवाब देंहटाएं
  2. कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ....सही कहा है ..
    ....बढ़िया रचना ....

    जवाब देंहटाएं
  3. सुन्दर कविता
    अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर

    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है
    अगर पसंद आये तो कृपया फोल्लोवेर बनकर अपने सुझाव दे

    जवाब देंहटाएं

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