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15 जनवरी 2018

आंख में आंसू भर—भर आये....सुदेश यादव जख्मी


वो  हमको   ऐसा  बिसराये,  सावन   में
आंख में आंसू भर—भर आये, सावन में

बिजली  चमके  बादल  गरजे,  डर जाउं
रिमझिम मन में प्यास जगाये,सावन में

खिलते  फूल  महकती कलियां, न भायें
पुरवा   बैरन  आग  लगाये ,सावन   में

इतना  हरजाई  निकलेगा,  सनम मेरा
इश्क  किया  करके  पछताये, सावन में

पिछले खत पढ—पढ के ये दिल,रोता है
अब  विरहन से  सहा  न जाये, सावन में

क्या  लेना  दुनियां  से मुझको, बिन तेरे
दिलकश  ये  मौसम  न  भाये, सावन में

नहीं  गिला, शिकवा  हमको, बेगानों से
जख्मी  ने  ही  जख्म  लगाये,सावन में

        -सुदेश यादव जख्मी
    कवि, साहित्यकार

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