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26 दिसंबर 2017

सतरंगी सँसार.....डॉ. इन्दिरा गुप्ता

अतरंगी सा रंग रहा 
सतरंगी सँसार 
सहस्त्र रंग का हो रहा 
निश दिन कारोबार ! 

हर रंग खिल खिल कहे 
काहे पँख पसारे नाय 
बेरंगी सँसार को 
पल मै रंग दे आय ! 

पवन बहे परवाज़ रंग 
नदी निरन्तरता नीर 
पाहन चढ़ चट्टान को 
रंग देते कर्मठ वीर ! 

दुख सुख और अवसाद के 
होते रंग हजार 
छाये जब सँतोष रंग 
सब मिल एक रंग बन जाये ! 
डॉ.इन्दिरा गुप्ता ✍

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन स्वतंत्रता सेनानी - ऊधम सिंह और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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