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19 सितंबर 2013

मेरी बांहों में खुशियों की बारात है

 गीत
राजेश त्रिपाठी
आपका साथ है, चांदनी रात है।
मेरी बांहों में खुशियों की बारात है।।
मैंने सपनों में बरसों तराशा जिसे।
वही मन के मंदिर की मूरत हो तुम।।
तारीफ में अब तेरी क्या कहूं।
खूबसूरत से भी खूबसूरत हो तुम।।
रंजो गम मिट गये मिल गयी ऐसी सौगात है।
मेरी बांहों में खुशियों की सौगात है।।
तुम मिली जिंदगी जिंदगी बन गयी।
तेरी चाहत मेरी बंदगी बन गयी ।।
नजरों में तुम, नजारों में तुम हो।
महकती हुई इन बहारों में तुम हो।।
तुम मेरी कल्पना, तुम मेरी रागिनी,
बस तुम्ही से ये मेरे नगमात हैं।
मेरी बांहों में खुशियों की बारात है।।
कामनाओं ने लीं फिर से अंगडाइयां।
यूं लगा बज उठीं फिर से शहनाइयां।।
हवा मदभरी फिर लगी डोलने।
बागों में कोयल लगी बोलने।।
क्या तेरे हुश्न की ये करामात है।
मेरी बांहों में खुशियों की बारात है।।
मन हुआ बावरा यूं तेरे प्यार में।
तुम बिन भाता नहीं कुछ भी संसार में।।
तुमसे शुरू प्यार की दास्तां।
खत्म भी तुम में होती है ऐ मेहरबां।।
अब तेरे बिन नहीं चैन दिन-रात है।
मेरी बांहों में खुशियों की बारात है।।

2 टिप्‍पणियां:


  1. तुमसे शुरू प्यार की दास्तां।
    खत्म भी तुम में होती है ऐ मेहरबां।।
    सुंदर रचना


    सादर।

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    उत्तर
    1. प्रिय कुलदीप जी मेरी भावनाओं को सराहने के लिए आभार। आशा है कि आपका यह मंच मुझे व्यापक फलक देगा और मेरी रचनाएं पाठकों के एक बड़े वर्ग तक पहुंच पायेंगी।-राजेश त्रिपाठी

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