ब्लौग सेतु....

12 नवंबर 2017

हे प्रिय

ये सुनने मे कोई कष्ट नही

तुम किसी और की हो 

सत्य है ये 

कष्ट तो तब होता है

जब तुम मेरे वास्तविक स्वप्न मे आती हो

कदाचित न आया करो

हे प्रिय! 

तुम्हारे आने से मेरी सांस

ऊर्ध्वप्रवाहित होने लगती है 

कौन सा बल है तुम मे,

जो धरा के मनुष्य मे नही

यदि होता तो मेरे लिए सरल होता

प्रतिदिन टूटते इन अश्रुओं के बांध को 

एक स्थायित्व देना

     -- हिमांशु मित्रा

3 टिप्‍पणियां:

  1. दिनांक 14/11/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (14-11-2017) को
    "कभी अच्छी बकवास भी कीजिए" (चर्चा अंक 2788)
    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं

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