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18 मई 2017
तेवरी
तेवरी
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सूखा का कोई हल देगा
मत सोचो बादल जल देगा
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जो वृक्ष सियासत ने रोपा
ये नहीं किसी को फल देगा
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बस यही सोचते अब रहिए
वो सबको राहत कल देगा
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ये दौर सभी को चोर बना
सबके मुख कालिख मल देगा
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वो अगर सवालों बीच घिरा
मुद्दे को तुरत बदल देगा
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उसने हर जेब कतर डाली
वो बेकल को क्या कल देगा
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+रमेशराज
तेवरी
तेवरी
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गुलशन पै बहस नहीं करता
मधुवन पै बहस नहीं करता
जो भी मरुथल में अब बदला
सावन पै बहस नहीं करता |
कहते हैं इसे न्यूज़-चैनल
ये जन पै बहस नहीं करता |
है इसीलिये वह तहखाना
आँगन पै बहस नहीं करता |
वो बोल रहा है “ ओम शांति “
क्रन्दन पै बहस नहीं करता |
वो करता धड़ से तुरत अलग
गर्दन पै बहस नहीं करता |
वो मौतों का व्यापारी है
जीवन पै बहस नहीं करता |
वो लिए सियासी दुर्गंधें
चन्दन पै बहस नहीं करता |
+रमेशराज
तेवरी
|| तेवरी ||
जिनको देना जल कहाँ गये
सत्ता के बादल कहाँ गये
?
कड़वापन कौन परोस गया
मीठे-मीठे फल कहाँ गये
?
जनता थामे प्रश्नावलियां
सब सरकारी हल कहाँ गये
?
जो अरि का सर पल में काटें
उन वीरों के बल कहाँ गये
?
क्या सबको सांप सूंघ बैठा
प्रतिपक्षी सब दल कहाँ
गये ?
कल तक तो यहाँ कतारें
थीं
चौराहों के नल कहाँ गये
?
तुम दानी कर्ण बने क्यों
थे
अब कहते कुण्डल कहाँ गये
?
+रमेशराज
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