रउवा अइली तो जिन्दगी अइली ;
रउवा गइली तो जिन्दगी गइली .
ना पसीजी कसम ओ विनती से ;
रउवा काहे कठोर हो गइली .
प्रेम की ज्योति बुझइलू रउवा ;
आग हमरी घंघोर हो गइली .
रउवा कोंपल नई उगा लेबू ;
हमरी ताउम्र की पतझर भइली .
हमरी अंखिअंन में ख्वाब फिर न बसें ;
रउवा अंसुअंन का पहरा दे गइली .
दिल - लगी रउवा दिल्लगी समझी ;
दिल की दुर्गति हमार कर गइली .
रउवा खातिर जो मोहब्बत खेला ;
हमरा खातिर तो इबादत रहिली .
हम केहू से नहीं कहा दुखड़ा ;
ढल के ग़ज़लन में , शोर हो गइली .
गोमती नगर ,लखनऊ .
( शब्दार्थ > रउवा = आप / तुम )