ब्लौग सेतु....

15 जुलाई 2017

तुम्हारा साथ.......

एक तुम्हारा साथ सजनी 
हमको हम से प्यारा है 
तुम चाह जीवन की मेरे
प्रेरक साथ तुम्हारा है....

बैठो जो पहलू में मेरे
रचूँ कविता साँझ-सवेरे
रहूँ निरखता रूप तुम्हारा
चंदा ज्यूँ बदली को घेरे....

करलूँ मैं बातें मीठी सी
रंग लूँ रात प्यार में
छू लूँ मैं हलके से तुमको
सावन की बहार में...

नैनों में देखूँ मैं दुनिया
दामन में सुख सपनों का 
हाथों में निरखूँ मैं किस्मत
आँगन को घर आपनों का....

.............................................© के. एल. स्वामी 'केशव'


कुछ भी व्यर्थ नहीं

हर रात नींद की क्यारी में
बोते है चंद बीज ख्वाब के
कुछ फूल बनकर मुस्कुराते है
कुछ दफ्न होकर रह जाते है
बनते बिगड़ते ज़िदगी के राह में
चंद सपनों के टूट जाने से
जीवन व्यर्थ नहीं हो सकता।

आस निराश के पंखो़ में उड़कर
पंछी ढ़ूढ़े बसेरा पेड़़ो से जुड़कर
कभी मिलती है छाँव सुखों की
धूप तेज लगती है दुखो की
हर दिन साँझ के रूठ जाने से
भोर का सूरज व्यर्थ नहीं हो सकता।

रोना धोना, रूठना मनाना
लड़ना झगड़ना बचपन सा जीवन
जिद में अड़ा कभी उदास खड़ा
खोने का डर पाने की हसरत
कभी बेवजह ही मुस्कुराता चला
मासूम ख्वाहिशों को हाथों मे लिये
चंद खिलौने के फूट जाने से
बचपन तो व्यर्थ नहीं हो सकता।

कुछ भी व्यर्थ नहीं जीवन में
हर बात में अर्थ को पा लो
चंद साँसों की मोहलत मिली है,
चाहो तो हर खुशी तुम पा लो
आँखों पे उम्मीद के दीये जलाकर
हर तम पे विजय तुम पा लो
कुछ गम के मिल जाने से
अर्थ जीवन का व्यर्थ नहीं हो सकता।

       #श्वेता🍁

9 जुलाई 2017

चूड़ियाँ

छुम छुम छन छन करती
कानों में मधुर रस घोलती
बहुत प्यारी लगी थी मुझको
पहली बार देखी जब मैंने
माँ की हाथों में लाल चूड़ियाँ
टुकुर टुकुर ताकती मैं
सदा के लिए भा गयी
अबोध मन को लाल चूड़ियाँ
अपनी नन्ही कलाईयों में
कई बार पहनकर देखा था
माँ की उतारी हुई नयी पुरानी
खूब सारी काँच की चूड़ियाँ

वक्त के साथ समझ आयी बात
कलाई पर सजी सुंदर चूड़ियाँ
सिर्फ एक श्रृंगारभर नहीं है
नारीत्व का प्रतीक है ये
सुकोमल अस्तित्व को
परिभाषित करती हुई
खनकती काँच की चूड़ियाँ
जिस पुरुष को रिझाती है
सतरंगी चूड़ियों की खनक से
उसी के बल के सामने
निरीह का तमगा पहनाती
ये खनकती छनकती चूड़ियाँ

ब्याह के बाद सजने लगती है
सुहाग के नाम की चूड़ियाँ
चुड़ियों से बँध जाते है
साँसों के आजन्म बंधन
चुड़ियों की मर्यादा करवाती
एक दायित्व का एहसास
घरभर में खनकती है चूड़ियााँ
सबकी जरूरतों को पूरा करती
एक स्वप्निल संसार सजाती
रंग बिरंगी काँच  की चूड़ियाँ

चूड़ियों की परिधि में घूमती सी
अन्तहीन ख्वाहिशें और सपनें
टूटते,फीके पड़ते,नये गढ़ते
चूड़ियों की तरह ही रिश्ते भी
हँसकर रोकर सुख दुख झेलते
पर फिर भी जीते है सभी
एक नये स्वप्न की उम्मीद लिए
कलाईयों में सजती हुई
नयी काँच चूड़ियों की तरह
जीवन भी लुभाता है पल पल
जैसे खनकती काँच की चूड़ियाँ

               #श्वेता🍁

6 जुलाई 2017

एक ख्वाब

खामोश रात के दामन में,
जब झील में पेड़ों के साये,
गहरी नींद में सो जाते है
उदास झील को दर्पण बना
चाँद मुस्कुराता होगा,
सितारों जड़ी चाँदनी की
झिलमिलाती चुनरी ओढ़कर
डबडबाती झील की आँखों में
मोतियों सा बिखर जाता होगा
पहर पहर रात को करवट
बदलती देख कर दिल
आसमां का धड़क जाता होगा
दूर अपने आँगन मे बैठा
मेरे ख्यालों में डूबा वो
हथेलियों में रखकर चाँद
आँखों में भरकर मुहब्बत
मेरे ख्वाब सजाता तो होगा।

5 जुलाई 2017

भाग्य विधाता....प्रमोद राय


न्यूज पोर्टल का “साप्ताहिक राशिफल” सेक्शन खूब हिट हो रहा था। कोई ऐसा दिन नहीं था, जब दो-चार ई-मेल न आते हों। पाठकों की जबर्दस्त प्रतिक्रिया को देखते हुए वेबसाइट के होमपेज पर “राशिफल” को थोड़ा हाईलाइट किया गया।

एक दिन कॉपी एडिटर राधेश्याम ने बॉस को बताया कि पंडित चतुरानन चतुर्वेदी के यहाँ से अभी तक राशिफल नहीं आया है। आमतौर पर राशिफल की कॉपी शुक्रवार तक दफ्तर में पहुँच जाती थी। राधेश्याम हस्तलिखित राशिफल को कंपोज करता, फिर उन्हें एडिट करके हर वीकेंड साइट पर अपलोड किया करता था। बॉस ने पंडित चतुरानन के यहाँ फोन करवाया तो पता चला कि आउट ऑफ स्टेशन हैं। बॉस ने खीझते हुए कहा, इसका भी भाव बढ़ता जा रहा है, लगता है कॉन्ट्रैक्ट तोड़ना पड़ेगा। फिर चुटकी बजाते हुए बोले, "यार राधेश्याम, एक काम करो। दो चार महीने पुराना राशिफल उठाओ, भाषा में थोड़ा फेरबदल करो और अपलोड कर दो।"

धश्याम ने वैसा ही किया। अगले हफ्ते फीडबैक और जबर्दस्त था। इस सेक्शन पर कई गुना ज्यादा “हिट”पड़े । ई-मेल की संख्या भी बढ़ी थी, जिनमें से कई में सटीक भविष्यवाणी के कसीदे पढ़े गए थे।

कुछ दिनों बाद फिर ऐसा हुआ कि पंडित चतुरानन चतुर्वेदी समय पर राशिफल नहीं भेज पाए। इस बार राधेश्याम को एक नया आयडिया सूझा। उसने पिछले महीने का राशिफल उठाया। राशियों का भाग्यफल परस्पर बदलते हुए मेष की जगह कर्क, तुला की जगह मिथुन और कुंभ की जगह धनु की भविष्यवाणियाँ “कट एण्ड पेस्ट” कर दीं। बिल्कुल नया राशिफल तैयार था।

कुछ दिनों बाद बेहतर फीडबैक और साइट की बढती रेटिंग को देखते हुए “साप्ताहिक राशिफल” को बदलकर “आज का राशिफल” कर दिया गया। अब यह सेक्शन रोजाना अपडेट होने लगा।

-प्रमोद राय