ब्लौग सेतु....

14 अक्तूबर 2014

खुदा कि रजायें ..तय होती हैं -- वंदना सिंह


वफायें  ..जफ़ाएं   तय होती है 
इश्क में सजाएं  तय होती हैं 

पाना खोना हैं जीवन के पहलू 
खुदा की  रजाएं.. तय होती हैं 

ये माना... के गुनहगार हूँ मैं 
मगर कुछ खताएं तय होती हैं 

कोई मौसम सदा नहीं रहता 
जिन्दगी में हवाएं तय होती हैं 

होनी को चाहिए ...बहाना कोई 
अनहोनी कि वजहायें तय होती हैं !



10 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 16/10/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बृहस्पतिवार (16-10-2014) को "जब दीप झिलमिलाते हैं" (चर्चा मंच 1768) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. पाना खोना हैं जीवन के पहलू
    खुदा की रजाएं.. तय होती हैं
    ..बहुत खूब!

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  4. भावपूर्ण सुन्दर रचना, लिखती रहिये.

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  5. होनी को चाहिए ...बहाना कोई
    अनहोनी कि वजहायें तय होती हैं !

    ..........bahut hi behtreen aise hi likhti rahiye

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