आखिर क्यों होते हैं युद्ध?
क्यों बोये जाते हैं बम ।
क्यों लहलहाती है उसमें ,
आतंक की फसल ।
बीच चौराहो पर जब ,
फूटते हैं बम ।
छितरा जाती हैं चारों ओर,
लाशें ही लाशें ।
हर ओर चीख पुकार ,
मातम ही मातम ।
फैल जाता है सडकों पर ,
बस खून ही खून ।
पा जाते हैं चंद जमीनें ,
मनाते हैं जीत का जश्न ।
लेकिन सोचा है कभी ,
क्या होगा इस युद्ध का अंत ।
दमघोटू बम के धुएँ में ,
क्या जी पाएंगे हम ।
खून से भरा नदिया का जल ,
क्या पी पाएंगे हम ।
-श्रीमती राजेश्वरी जोशी
उत्तराखण्ड भारत

