ब्लौग सेतु....

18 मई 2017

तेवरी




|| तेवरी ||
बुझते सपनों को मिल साथी कुछ तो दो आकर नया
नव निर्माण चाहता भारत माँग रहा आधार नया |

नाम धर्म का ले भारत में जाने कितनी जान गईं
नफरत को दो प्रीति रीति का श्रीमान संसार नया |

भेद मिटें सब जात-पांत के प्रान्तवाद के स्वर टूटें
और न कर बैठे अरि हम पर सोच-समझकर वार नया |

बहुत झुलस ली भोली जनता भेद-भाव की आतिश में
और न रख जाये भेदों का अब दुश्मन अंगार नया |

उत्तर यदि होगा उत्तम तो जय-जयकार सुनायी दे
श्रीमान जनता को भाए सत्ता का अभिसार नया |

+रमेशराज

तेवरी




|| तेवरी ||
बदगुमाँ पहले न था ऐसे ज़ेहन कश्मीर का |
नफरतों से भर रहा तू पाक मन कश्मीर का |

फिर किया घायल इसे तेरी सियासी चाल ने
पड़ रहा हमको सुनायी फिर रुदन कश्मीर का |

जो उठाये आँख इस पर फोड़ दें हम आँख वो
हमसे रक्षा का जुड़ा है हर वचन कश्मीर का |
+रमेशराज
 

किसानों की दुर्दशा पर एक तेवरी




किसानों की दुर्दशा पर एक तेवरी
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सरकारी कारण लुटौ खूब कृषक कौ धान
रह गयौ बिना रुपैया, धान कौ हाय बुवैया |

दरवाजे पे कृषक के ठाडौ साहूकार
ब्याज के बदले भैया, खोलि लै जावै गैया |

करें खुदकुशी देश के अब तौ रोज किसान
न कोई धीर धरैया , कर्ज में डूबी नैया |

आलू-गेंहू सड़ गये बेमौसम बरसात
कृषक के दैया-दैया, उड़ि रहे प्राण-पपैया |

छीनौ भूमि किसान से, है सरकारी शोर
कृषक के दुःख पर भैया, सेठ की ताताथैया |

+रमेशराज

तेवरी




|| तेवरी  || 
नारे थे यहाँ स्वदेशी के
हम बने विदेशी माल , सुन लाल !
अपने हैं ढोल नगाड़े पर
ये मढ़े चीन की खाल , सुन लाल !
हम गदगद अपने बागों में
अब झूले चीनी डाल , सुन लाल |
हम वो संगीत शास्त्री हैं
स्वर में अमरीकी ताल , सुन लाल !

+रमेशराज

पद जैसी शैली में तेवरी




|| पद जैसी शैली में तेवरी ||
कैसे  भये डिजीटल ऊधौ
पहले थे हम सोने जैसे , अब हैं पीतल ऊधौ |
अब हर बात  तुम्हारी लगती
है छल ही छल , है छल ही छल , है छल ही छल ऊधौ |
कहकर अच्छे दिन आयेंगे
पाँव पाँव में डाल रहे हो सबके साँकल ऊधौ |
पी ली हमने कड़वी औषधि
रोग हमें क्यों घेर रहे फिर  बोलो पल पल ऊधौ |

+रमेशराज