ब्लौग सेतु....

25 दिसंबर 2017

फिर शहर जला दिया ......डॉ.विमल ढौंडियाल

आज फिर तुमने शहर जला दिया
हरि भूमि राह देख रही
मृत्यु ताण्डव झेल रही
आस की हर साँस में
पाञ्चजन्य पुकार रही
कृष्ण की इस धर्मधरा पर
क्यों फिर रक्त बहा दिया
आज फिर तुमने शहर जला दिया |

चीर फिर लहरा रहा
भीम उर को चीर रहा
कौरव हैं निस्तब्ध नि:शब्द
पाण्डव बिगुल बजा रहा
दुशासन के हाथ बचाने 
याज्ञसैनी को जला दिया
आज फिर तुमने शहर जला दिया
-डॉ.विमल ढौंडियाल 

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (26-12-2017) को "स्वच्छता ही मन्त्र है" (चर्चा अंक-2829) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    क्रिसमस हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ही सुंदर....आभार आप का.....

    जवाब देंहटाएं
  3. सभी काव्य रसास्वादन निपुण गुणिजनों का साधुवाद

    जवाब देंहटाएं

स्वागत है आप का इस ब्लौग पर, ये रचना कैसी लगी? टिप्पणी द्वारा अवगत कराएं...