ग़ौर से देखो गुलशन में
बयाबान का साया है ,
ज़ाहिर-सी बात है
आज फ़ज़ा ने बताया है।
इक दिन मदहोश हवाऐं
कानों में कहती गुज़र गयीं,
उम्मीद-ओ-ख़्वाब का दिया
हमने ही बुझाया है।
आपने अपना खाता नम्बर
विश्वास में किसी को बताया है
तभी तो तबादला होकर दर्द
आपके हिस्से में आया है।
दर्द अंगड़ाई ले लेकर
जाग उठता है पहर-दर-पहर
कुछ ब्याज का हिस्सा भी
बरबस आकर समाया है।
आपके तबस्सुम में रहे
वो रंग-ओ-शोख़ियां अब कहाँ ?
उदास तबियत का
दिन-ओ-दिन भारी हुआ सरमाया है।
बिना अनुमति के खाते में
न कुछ जोड़ा जाए
अब जाकर राज़दार का पता
बैंक से की इल्तिजा में बताया है।
#रवीन्द्र सिंह यादव