ब्लौग सेतु....

21 दिसंबर 2013

दोस्तों से डर लगे







राजेश त्रिपाठी
रहबर कभी थे आजकल राहजन होने लगे।
मूल्य सारे क्यों भला इस तरह खोने लगे।।
स्वार्थ की आग में जल गयी इनसानियत।
दुश्मनों की कौन पूछे दोस्तों से डर लगे।।

जमीं पर था कभी अब आसमां को चूमता।
उसको इनसानियत का पाठ बेमानी लगे।।
झोंपड़ी सहमी हुई है, बंगले तने शान से।
ये तरक्की की तो हमें बस लंतरानी लगे।।

आपने देखा अपना आज का ये हिंदोस्तां।
हर तरफ मुफलिसी औ गम के मेले लगे।।
कोई मालामाल तो कर रहा है फांके कोई।
ख्वाब गांधी का तो अब यहां फानी लगे।।

हर तरफ नफऱत रवां है, आदमी बेजार है।
प्यार लेता सिंसकियां दुश्मनी हंसती लगे।।
हम भला क्या कहें अब सारा जहां बीमार है।
मुल्क में लोग खौफ के ख्वाब हैं बोने लगे।।

पाठ समता का कभी जिसने पढ़ाया खो गया।
सुख की सोये नींद कोई कोई कर रहा रतजगे।।
दुनिया में जो था आला आज वह बदहाल है।
ये खुशी तो है नहीं हंसता आदमी रोने लगे।।



4 टिप्‍पणियां:

  1. आप की ये सुंदर रचना आने वाले सौमवार यानी 23/12/2013 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित है...
    सूचनार्थ।


    एक मंच[mailing list] के बारे में---
    एक मंच हिंदी भाषी तथा हिंदी से प्यार करने वाले सभी लोगों की ज़रूरतों पूरा करने के लिये हिंदी भाषा , साहित्य, चर्चा तथा काव्य आदी को समर्पित एक संयुक्त मंच है
    इस मंच का आरंभ निश्चित रूप से व्यवस्थित और ईमानदारी पूर्वक किया गया है
    उद्देश्य:
    सभी हिंदी प्रेमियों को एकमंच पर लाना।
    वेब जगत में हिंदी भाषा, हिंदी साहित्य को सशक्त करना
    भारत व विश्व में हिंदी से सम्बन्धी गतिविधियों पर नज़र रखना और पाठकों को उनसे अवगत करते रहना.
    हिंदी व देवनागरी के क्षेत्र में होने वाली खोज, अनुसन्धान इत्यादि के बारे मेंहिंदी प्रेमियों को अवगत करना.
    हिंदी साहितिक सामग्री का आदान प्रदान करना।
    अतः हम कह सकते हैं कि एकमंच बनाने का मुख्य उदेश्य हिंदी के साहित्यकारों व हिंदी से प्रेम करने वालों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहां उनकी लगभग सभी आवश्यक्ताएं पूरी हो सकें।
    एकमंच हम सब हिंदी प्रेमियों का साझा मंच है। आप को केवल इस समुह कीअपनी किसी भी ईमेल द्वारा सदस्यता लेनी है। उसके बाद सभी सदस्यों के संदेश या रचनाएं आप के ईमेल इनबौक्स में प्राप्त करेंगे। आप इस मंच पर अपनी भाषा में विचारों का आदान-प्रदान कर सकेंगे।
    कोई भी सदस्य इस समूह को सबस्कराइब कर सकता है। सबस्कराइब के लिये
    http://groups.google.com/group/ekmanch
    यहां पर जाएं। या
    ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजें।


    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय कुलदीप जी मेरे भावों को आदर देने के लिए आभार। नयी पुरानी हलचल में इसे स्थान देकर इसको व्यापक फलक देने के आपके प्रयास को साधुवाद। आपका यही प्यार हमें और बेहतर कुछ लिखने का प्रोत्साहन देगा।

      हटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (22-12-13) को वो तुम ही थे....रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1469 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय शास्त्री जी नमन। आपका सहस्रशः आभार श्रीमन। आपने मेर भावों को सराहा यह आपका प्यार है। इस कृपा के लिए आपको प्रणाम शत बार है। चर्चा में भी होगी हमारी चर्चा वाह क्या बात है। आपकी जर्रानवाजी है वरना अपनी क्या बिसात है।

      हटाएं

स्वागत है आप का इस ब्लौग पर, ये रचना कैसी लगी? टिप्पणी द्वारा अवगत कराएं...