ब्लौग सेतु....

4 जनवरी 2014

अश्कों के फूल चुन के संवारी है जिंदगी

 

 

 

 राजेश त्रिपाठी

पूछो न किस तरह से गुजारी है जिंदगी।
अश्कों के फूल चुन के संवारी है जिंदगी।।
आंखें खुलीं तो सामने अंधियारा था घना।
असमानता अभाव का माहौल था तना।।
मतलब भरे जहान में असहाय हो गये।
दुख दर्द मुश्किलों का पर्याय हो गये।।
दुनिया के दांव पेच से हारी है जिंदगी। (अश्कों के फूल ...)
आहत हुईं भलाइयां, सतता हुई दफन।
युग आ गया फरेब का, क्या करें जतन।।
ऐसे बुरे हालात की मारी है जिंदगी (अश्कों के फूल ...)
चेहरे पे जहां चेहरा लगाये है आदमी।
ईमानो-वफा बेच कर खाये है आदमी।।
हर सिम्त नफरतों के खंजर तने जहां।
कैसे वजूद अपना बचायेगा आदमी।।
जीवन की धूपछांव से हारी है जिंदगी (अश्कों के फूल..)
सियासत की चालों का देखो असर।
आग हिंसा की फैली शहर दर शहर।।
आदमी आदमी का दुश्मन बना है।
हर तरफ नफरतों का अंधेरा घना है।।
इन मुश्किलों के बीच हमारी है जिंदगी (अश्कों के फूल..)

7 टिप्‍पणियां:

  1. ***आपने लिखा***मैंने पढ़ा***इसे सभी पढ़ें***इस लिये आप की ये रचना दिनांक 6/01/2014 को नयी पुरानी हलचल पर कुछ पंखतियों के साथ लिंक की जा रही है...आप भी आना औरों को भी बतलाना हलचल में सभी का स्वागत है।


    एक मंच[mailing list] के बारे में---


    एक मंच हिंदी भाषी तथा हिंदी से प्यार करने वाले सभी लोगों की ज़रूरतों पूरा करने के लिये हिंदी भाषा , साहित्य, चर्चा तथा काव्य आदी को समर्पित एक संयुक्त मंच है
    इस मंच का आरंभ निश्चित रूप से व्यवस्थित और ईमानदारी पूर्वक किया गया है
    उद्देश्य:
    सभी हिंदी प्रेमियों को एकमंच पर लाना।
    वेब जगत में हिंदी भाषा, हिंदी साहित्य को सशक्त करना
    भारत व विश्व में हिंदी से सम्बन्धी गतिविधियों पर नज़र रखना और पाठकों को उनसे अवगत करते रहना.
    हिंदी व देवनागरी के क्षेत्र में होने वाली खोज, अनुसन्धान इत्यादि के बारे मेंहिंदी प्रेमियों को अवगत करना.
    हिंदी साहितिक सामग्री का आदान प्रदान करना।
    अतः हम कह सकते हैं कि एकमंच बनाने का मुख्य उदेश्य हिंदी के साहित्यकारों व हिंदी से प्रेम करने वालों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहां उनकी लगभग सभी आवश्यक्ताएं पूरी हो सकें।
    एकमंच हम सब हिंदी प्रेमियों का साझा मंच है। आप को केवल इस समुह कीअपनी किसी भी ईमेल द्वारा सदस्यता लेनी है। उसके बाद सभी सदस्यों के संदेश या रचनाएं आप के ईमेल इनबौक्स में प्राप्त करेंगे। आप इस मंच पर अपनी भाषा में विचारों का आदान-प्रदान कर सकेंगे।
    कोई भी सदस्य इस समूह को सबस्कराइब कर सकता है। सबस्कराइब के लिये
    http://groups.google.com/group/ekmanch
    यहां पर जाएं। या
    ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजें।


    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय भाई, आपका आभार। ऐसे ही बनाये रहिएगा प्यार। यही तो है हमारे प्रोत्साहन का आधार। अापने अपने मंच में दिया स्थान। इसके लिए धन्यवाद श्रीमान।।

      हटाएं
  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है.
    http://iwillrocknow.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. नीतीश जी धन्यवाद आपको भाये मेरे भाव। ऐसे प्रोत्साहन से बढ़ता है नया कुछ रचने का चाव। यों ही करते रहे हौसलाआफजाई। आपका हम पर बड़ा उपकार है भाई।

      हटाएं
  3. उत्तर
    1. आपने की हमारी हौसलाआफजाई। बधाई दिल से आपको है भाई। यों ही बनाये रहिएगा अपना प्यार। ऐसे प्रोत्साहन ही हैं अच्छा लिखवाने के आधाऱ।

      हटाएं

स्वागत है आप का इस ब्लौग पर, ये रचना कैसी लगी? टिप्पणी द्वारा अवगत कराएं...