ब्लौग सेतु....

28 मार्च 2015

अधुरा सा प्यार मेरा - पलक


डरा सा बैठा है सीने में कहीं
एक ख्याल तेरा
फिर कभी यूँ आंसुओं में बह जाता है
अरमान मेरा
चुप है आज जिन्दगी मेरी
चुप सा है आज
आसमान मेरा
ढूढती फिरती हूँ
बीते हुए लम्हों में तुझे
आँखों में आज भी है
इन्तेजार तेरा
ऐ जाने वाले एक बार तो समझ
ये अधुरा सा प्यार मेरा.....!!

लेखक परिचय - पलक

9 टिप्‍पणियां:

  1. श्री राम नवमी की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (29-03-2015) को "प्रभू पंख दे देना सुन्दर" {चर्चा - 1932} पर भी होगी!
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. अनुपम भाव लिये बेहतरीन प्रस्‍तुति

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  3. कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ....सही कहा है ..
    ....बढ़िया रचना ....

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  4. सुन्दर कविता
    अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर

    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है
    अगर पसंद आये तो कृपया फोल्लोवेर बनकर अपने सुझाव दे

    उत्तर देंहटाएं

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