ब्लौग सेतु....

17 मई 2015

मधु शाला 5 दोहो मे-जी पी पारीक



==============

मधुशाला मे शोर है, गणिका गाये राग!!
जाम भरा ले हाथ मे, पीने से अनुराग!!1!!

चषक लिये है साकिया, इतराती है चाल!!
सब पीकर है नाचते, ठुमकत दे दे ताल!!2!!

प्याला पीकर रस भरा, केवल रब का भान !!
लघुता या गुरूता नहि, सब मे एक ही जान !!3!!

हाला पीकर बावला, बजा रहा है गाल !!
सिर के उपर नाच रहा, स्वर्ण चषक ले काल !!4!!

मित् वत जिनको देखता, घट मे खोटे जान !!
प्याले से प्याला मिला, असल मीत है मान !!5!!

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (18-05-2015) को "आशा है तो जीवन है" {चर्चा अंक - 1979} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
    ---------------

    उत्तर देंहटाएं
  2. क्या बात है ये तो सर चढ कर बोल रहा है

    उत्तर देंहटाएं

स्वागत है आप का इस ब्लौग पर, ये रचना कैसी लगी? टिप्पणी द्वारा अवगत कराएं...