26 सितंबर 2015

बेवफा ज़िन्दगी .....स्नेहा गुप्ता


अब भी तो कुछ रहम कर ऐ बेवफा ज़िन्दगी
दे रही किस बात की तू सज़ा ज़िन्दगी

सांस लेना भी क्या अब गुनाह हो चला है
हो रही क्या मुझसे यही खता ज़िन्दगी..

ख़ुशी में खुश होने का भी हक दिया नहीं तूने
क्यों करती रही हरदम ज़फ़ा ज़िन्दगी

निचुड़ी हुई आँखे और होंठ बेबस मुस्कुराने को
क्यों ऐसी रही तेरी बेदर्द अदा ज़िन्दगी

बेरहम, तू उसे आने भी तो नहीं देती
कि मौत आये और तेरा हर सितम हो फना ज़िन्दगी  !!

लेखक परिचय -  स्नेहा गुप्ता

15 सितंबर 2015

दिये का रिश्‍ता देखो बाती से -- सदा


सजती है रंगोली आंगन में,
कण-कण में ये विश्‍वास लेकर,
जलेगा दीप शुभकामना का
अपनी उम्‍मीदों का
प्रकाश लेकर
भावनाओं की बाती को
स्‍नेह से दिये ने
अपने मस्‍तक लिया जब भी
'' तमसो मा ज्‍योतिर्गमय ''
का संदेश 'दीप' ने सदा
अंतिम श्‍वास तक दिया
 दिये का रिश्‍ता
देखो बाती से कितना गहरा है,
अंधकार नीचे जाकर ठहरा है !
आलोकमय हो इनके रिश्‍ते सा
हर जीवन इनके साये में देखो तो
खुशियों का पहरा है !!

लेखक परिचय - सदा



11 सितंबर 2015

गज़ल ( सेक्युलर कम्युनल )





गज़ल ( सेक्युलर कम्युनल )

जब से बेटे जबान हो गए
मुश्किल में क्यों प्राण हो गए

किस्से सुन सुन के संतों के
भगवन भी हैरान हो गए

आ धमके कुछ ख़ास बिदेशी
घर बाले मेहमान हो गए

सेक्युलर कम्युनल के चक्कर में
गाँव गली शमसान हो गए

कैसा दौर चला है अब ये
सदन कुश्ती के मैदान हो गए

बिन माँगें सब राय दे दिए
कितनों के अहसान हो गए

प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

8 सितंबर 2015

इम्तहान जिंदगी का -- पूनम श्रीवास्तव


हर कदम पर जिंदगी लेती है इम्तहान
कब कहां किस रूप में ले किसको पता।

उलझनों में इस कदर कर देती है गुमराह
सुलझाते सुलझाते आदमी हो जाता है परेशां।

कभी तो ये जिंदगी लगती रेत का मकां
जो हल्की सी आंधी में भी मिट जाती जाने कहां।

और कभी जिंदगी बन जाती मजबूत पतवार
भंवरों में से भी जूझ बढ़ आगे पा जाती मुकाम।

जिंदगी तो रखती है मौत से भी वास्ता
फ़िर आगे बढ़ा ले जाती है वो अपना कारवां।

जिंदगी को हर तरह से जीना है जिंदादिली का नाम
अजीज मान कर जी लें जिंदगी का हर लम्हां।

लेखक परिचय - पूनम श्रीवास्तव