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26 सितंबर 2015

बेवफा ज़िन्दगी .....स्नेहा गुप्ता


अब भी तो कुछ रहम कर ऐ बेवफा ज़िन्दगी
दे रही किस बात की तू सज़ा ज़िन्दगी

सांस लेना भी क्या अब गुनाह हो चला है
हो रही क्या मुझसे यही खता ज़िन्दगी..

ख़ुशी में खुश होने का भी हक दिया नहीं तूने
क्यों करती रही हरदम ज़फ़ा ज़िन्दगी

निचुड़ी हुई आँखे और होंठ बेबस मुस्कुराने को
क्यों ऐसी रही तेरी बेदर्द अदा ज़िन्दगी

बेरहम, तू उसे आने भी तो नहीं देती
कि मौत आये और तेरा हर सितम हो फना ज़िन्दगी  !!

लेखक परिचय -  स्नेहा गुप्ता

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (27-09-2015) को "सीहोर के सिध्द चिंतामन गणेश" (चर्चा अंक-2111) (चर्चा अंक-2109) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. ख़ुशी में खुश होने का भी हक दिया नहीं तूने
    क्यों करती रही हरदम ज़फ़ा ज़िन्दगी
    ...मन में ख़ुशी नहीं नहीं तो बेमजा लगती हैं जिंदगी

    ..बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  3. बहुत ही लाजवाब शेरों से सजी ग़ज़ल है ... बेमिसाल ...

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  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 01 अक्टूबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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