ब्लौग सेतु....

17 मई 2016

अंजाम क्या होगा (ग़ज़ल)

                                                                                                        इस बेनाम चाहत का न जाने अंजाम क्या होगा 
बैचैन दिल को जो सुकून देगा उसका नाम क्या होगा 
निगाहें  ढूंढती  हैं  हरपल  उस  हमसफ़र  को 
कहीं मिल वो जाये तो उसका निशान क्या होगा 
नहीं हर किसी के सामने दिल की किताब है खुलती 
किसी बेवफा के सामने हाल ऐ दिल बयां क्या होगा 
जो दिल उनकी याद में जल कर राख हो चुका है 
भला वो इस बेदर्द ज़माने से परेशान क्या होगा 
एक लम्बी सी जिंदगी जिसने तनहा गुजार दी हो 
उसके सब्र का भला और इम्तहान  क्या  होगा 
क़यामत से ही बस इक उम्मीद बाकी हो जिसे 
फिर उसके लिए जहर से उम्दा जाम क्या होगा 
उनके इंतज़ार ने अब तक इस दिल को ज़िंदा रखा 
उनसे मिलने से अच्छा भला और पैगाम क्या होगा 

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 18 मई 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (18-05-2016) को "अबके बरस बरसात न बरसी" (चर्चा अंक-2345) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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