ब्लौग सेतु....

3 अगस्त 2016

साथ तुम्हारा

🌹साथ तुम्हारा 🌹

कल तक जो किनारे थे,

अब सहारे बन गए है |

विरान थी दुनिया मेरी,

अब खुशियों के नजारे  बन गए हैं


जमाने में  तुम्हारा साथ क्या मिला,

पराए भी हमारे बन गए है |

वक्त की धुप में ,सूखने लगी है,

   अब गम की चादर ,

दुख भी अब सहारे बन गए हैं |

विरह मे छलके थे कभी जो आँसू ,

 अब मिलन मोती बन गए हैं |

जमाने में तुम्हारा साथ क्या मिला,

 पराए भी हमारे बन गए हैं |

                जी. एस. परमार

2 टिप्‍पणियां:

  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 09/08/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    उत्तर देंहटाएं

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