
Bhai Chara / भाईचारा / Brother Hood
Bhai Chara / भाईचारा / Brother Hood
क्या गजब है देशप्रेम,क्या स्वर्णिम इतिहास हमारा है|अजब-गजब कि मिलती मिसालें,क्या अद्भुत भाईचारा है||
जब भी दुश्मन आता सरहद पर,हमें देशप्रेम बुलाता है|माँ भारती कि आन-बान को,हर भारतवासी मर-मिट जाता है||
जब सैनिक भारत माँ कि रक्षा को,सीने पर गोली खाता है|हर भारतवासी के सीने को,वो लहूलुहान कर जाता है||
जब जब आई है विपदा हम पर,हम कंधे से कंधा मिलाते है|हम भारत माँ और उन वीर सपूतो के,वंदन को शीश झुकाते है||
वीर सपूतो के बलिदानों पर,हर भारत वासी हारा है|हम माँ भारती कि संताने है,और हिंदुस्तान हमारा है||क्या अद्भुत भाईचारा है||
ऋषभ शुक्ला
Hindi Kavita Manch / हिंदी कविता मंच
आप मेरी कविताओं को अगर पढ़ना चाहे तो नीचे लिंक पर जाकर मेरे ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं|Hindi Kavita Manch /हिन्दी कविता मंच - https://hindikavitamanch.blogspot.com/मेरी कहानियों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें|Mere Man Kee / मेरे मन की - https://meremankee.blogspot.com/मेरे यात्रा से संबंधित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें|Ghumakkadi Dil Se / घुमक्कड़ी दिल से - https://theshuklajee.blogspot.com/Facebook / फेसबुक - https://instagram.com/theshuklajeeInstagram / इंस्टाग्राम - https://www.facebook.com/theshuklajiiTwitter / ट्विटर - https://twitter.com/theshuklajeeYoutube / यूट्यूब - https://www.youtube.com/channel/MereManKeeContact Us / संपर्क करें - rushabhshukla8@gmail.comआपका ब्लॉग पर आने के लिए आभार, हमारे मार्गदर्शन हेतु पुनः पधारें | क्योकी आपके आगमन से ही हमारे लेखन में उत्साह की वृद्धी होती है | धन्यवाद |
कविता मंच प्रत्येक कवि अथवा नयी पुरानी कविता का स्वागत करता है . इस ब्लॉग का उदेश्य नये कवियों को प्रोत्साहन व अच्छी कविताओं का संग्रहण करना है. यह सामूहिक
ब्लॉग है . पर, कविता उसके रचनाकार के नाम के साथ ही प्रकाशित होनी चाहिये. इस मंच का रचनाकार बनने के लिये नीचे दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें,
ब्लौग सेतु....
Poetry लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Poetry लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
24 अगस्त 2020
Bhai Chara / भाईचारा / Brother Hood
Labels:
भाईचारा,
Bhai Chara,
Brother Hood,
Hindi,
Hindi Kavita Manch,
kavita,
mere man kee,
Poem,
Poetry
Location:
India
20 नवंबर 2019
Mujhe Yaad aaoge - Hindi Kavita Manch
मुझे याद आओगे
कभी तो भूल पाऊँगा तुमको,
मुश्क़िल तो है|
लेकिन,
मंज़िल अब वहीं है||
पहले तुम्हारी एक झलक को,
कायल रहता था|
लेकिन अगर तुम अब मिले,
तों भूलना मुश्किल होगा||
12 मई 2018
शहर
![]() |
| शहर |
फैला हुआ,
जहाँ तलक जाती नजर है
फैली हुई कंक्रीट
और का बड़ा अम्बार,
वक्त की कमी से बिखरते रिश्ते,
बढ़ती हुयी दूरी का कहर है,
पैरो से कुचला हुआ,
है अपनापन,
बस खुद से खुद के साथ,
विराना सफर है,
मेरे दिल को ना भाया यह शहर,
इसमें मेरे गाँव जैसी बात नहीं,
यही मेरे शहर से गाँव,
तक का सफर है,
आपका ब्लॉग पर आने के लिए आभार, हमारे मार्गदर्शन हेतु पुनः पधारें | क्योकी आपके आगमन से ही हमारे लेखन में उत्साह की वृद्धी होती है |धन्यवाद |
Labels:
शहर,
blog,
Hindi,
Hindi Kavita Manch,
kavita,
mere man kee,
meremankee,
Poem,
Poetry,
Rishabh Shukla,
shahar
Location:
Mumbai, Maharashtra, India
22 जून 2017
मेरे मन की
मेरी पहली पुस्तक "मेरे मन की" की प्रिंटींग का काम पूरा हो चुका है | और यह पुस्तक बुक स्टोर पर आ चुकी है| आप सब ऑनलाइन गाथा के द्वारा बुक कर सकते है| मेरी पहली बुक कविताओ और कहानीओ का अनुपम संकलन है|
आप सभी इसे ऑनलाइन गाथा (Online Gatha) के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर भी ऑर्डर कर सकते है| इसे अभी ऑर्डर करने के लीये इस लींक पर जाएं|
इसे आप (Snapdeal) पर भी ऑर्डर कर सकते है| इसे अभी ऑर्डर करने के लीये इस लींक पर जाएं|
इसे आप फ्लिपकार्ट (Flipcart) पर भी ऑर्डर कर सकते है| इसे अभी ऑर्डर करने के लीये इस लींक पर जाएं|
इसे आप शॉपकलूस (Shopcluse) पर भी ऑर्डर कर सकते है| इसे अभी ऑर्डर करने के लीये इस लींक पर जाएं|
इसे आप स्मशवर्ड (Smashword) पर भी ऑर्डर कर सकते है| इसे अभी ऑर्डर करने के लीये इस लींक पर जाएं|
इसे आप एबीज़ी (Ebezee) पर भी ऑर्डर कर सकते है| इसे अभी ऑर्डर करने के लीये इस लींक पर जाएं|
इसे आप ईबे (Ebay) पर भी ऑर्डर कर सकते है| इसे अभी ऑर्डर करने के लीये इस लींक पर जाएं|
शुक्रिया
Labels:
book,
Hindi,
hindi blog,
Hindi Kavita Manch,
jindagi,
kavita,
kavya Sangrah,
love,
mere man kee,
online gatha,
Poem,
Poetry,
Rishabh Shukla
Location:
Bhadohi, Uttar Pradesh, India
15 नवंबर 2015
देश के भविष्य
बच्चो,
तुम इस देश के भविष्य हो,
तुम दिखते हो कभी,
भूखे, नंगे ||
कभी पेट की क्षुधा से,
बिलखते-रोते.
एक हाथ से पैंट को पकड़े,
दूजा रोटी को फैलाये ||
कभी मिल जाता है निवाला
तो कभी पेट पकड़ जाते लेट,
होली हो या दिवाली,
हो तिरस्कृत मिलता खाना ||
जब बच्चे ऐसे है,
तो देश का भविष्य कैसा होगा,
फिर भीबच्चो,
तुम ही इस देश के भविष्य हो ||
नोट :- सभी चित्र गूगल से लिए गए है |
Labels:
देश के भविष्य,
bachpan,
blog,
Childhood,
children,
country,
desh ke bhavishya,
future,
Gajal,
Geet,
Hindi,
hindi blog,
Hindi Kavita Manch,
kavita,
kavya Sangrah,
Poem,
Poetry,
Rishabh Shukla
Location:
Bhadohi, Uttar Pradesh, India
सदस्यता लें
संदेश (Atom)



