
Bhai Chara / भाईचारा / Brother Hood
Bhai Chara / भाईचारा / Brother Hood
क्या गजब है देशप्रेम,क्या स्वर्णिम इतिहास हमारा है|अजब-गजब कि मिलती मिसालें,क्या अद्भुत भाईचारा है||
जब भी दुश्मन आता सरहद पर,हमें देशप्रेम बुलाता है|माँ भारती कि आन-बान को,हर भारतवासी मर-मिट जाता है||
जब सैनिक भारत माँ कि रक्षा को,सीने पर गोली खाता है|हर भारतवासी के सीने को,वो लहूलुहान कर जाता है||
जब जब आई है विपदा हम पर,हम कंधे से कंधा मिलाते है|हम भारत माँ और उन वीर सपूतो के,वंदन को शीश झुकाते है||
वीर सपूतो के बलिदानों पर,हर भारत वासी हारा है|हम माँ भारती कि संताने है,और हिंदुस्तान हमारा है||क्या अद्भुत भाईचारा है||
ऋषभ शुक्ला
Hindi Kavita Manch / हिंदी कविता मंच
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24 अगस्त 2020
Bhai Chara / भाईचारा / Brother Hood
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12 मई 2018
शहर
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| शहर |
फैला हुआ,
जहाँ तलक जाती नजर है
फैली हुई कंक्रीट
और का बड़ा अम्बार,
वक्त की कमी से बिखरते रिश्ते,
बढ़ती हुयी दूरी का कहर है,
पैरो से कुचला हुआ,
है अपनापन,
बस खुद से खुद के साथ,
विराना सफर है,
मेरे दिल को ना भाया यह शहर,
इसमें मेरे गाँव जैसी बात नहीं,
यही मेरे शहर से गाँव,
तक का सफर है,
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22 जून 2017
मेरे मन की
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शुक्रिया
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