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5 अक्तूबर 2013

........है जिंदगी एक छलावा -- श्रीमती आशा लता सक्सेना जी :)



है जिंदगी एक छलावा
पल पल रंग बदलती है
है जटिल स्वप्न सी
कभी स्थिर नहीं रहती |
जीवन से सीख बहुत पाई
कई बार मात भी खाई
यहाँ अग्नि परीक्षा भी
कोई यश न दे पाई |
अस्थिरता के इस जालक में
फँसता गया ,धँसता गया
असफलता ही हाथ लगी
कभी उबर नहीं पाया |
रंग बदलती यह जिंदगी
मुझे रास नहीं आती
जो सोचा कभी न हुआ
स्वप्न बन कर रह गया |
छलावा ही छलावा
सभी ओर नज़र आया
इससे कैसे बच पाऊँ
विकल्प नज़र नहीं आया  !!

--  आशा लता सक्सेना 

5 टिप्‍पणियां:

  1. निराशा और उदासी से क्यों भला हम घबराएं
    कर्मों की रौशनी से आशा के सर्वदा दीप जलाएं
    सुर S

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  2. http://www.fcom.bu.edu.eg
    http://www.fcom.bu.edu.eg/fcom/index.php/dean-word
    http://www.fcom.bu.edu.eg/fcom/index.php/programms
    http://www.fcom.bu.edu.eg/fcom/index.php/team-work
    http://www.fcom.bu.edu.eg/fcom/index.php/students
    http://www.fcom.bu.edu.eg/fcom/index.php/dean-word
    http://www.fcom.bu.edu.eg/fcom/index.php/programms
    http://www.fcom.bu.edu.eg/fcom/index.php/staff
    http://www.fcom.bu.edu...om/index.php/talem-maftoh
    http://www.fcom.bu.edu.eg/fcom/index.php/dean-word
    http://www.fcom.bu.edu.eg/fcom/index.php/programms

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