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18 मार्च 2016

क्यो है --(ग़ज़ल)

                                                                                                                                                                   
                                                                                                           हर  किसी ने दिल में बदरंग तस्वीर उतारी क्यों है 
आज मुल्क में मोहब्बत पर नफरत भारी क्यों है 
मजहब की चादर से अमन धुल सा गया है 
और आज का इंसान नफरत का पुजारी क्यो  है 
जिस मुल्क के रुखसार पर चमकते थे चाँद सितारे 
वहां चौदहवी की रात आज अंधियारी क्यो  है 
पूरी दुनिया में शांति की मिशाल थे हम 
फिर अपने ही घर में कत्लेआम जारी क्यों है 
सुना है दिल का अमीर होता है हर हिंदुस्तानी 
फिर हर शक्श मोहब्बत बांटने में भिखारी क्यों है 
जीती थी हमने इस जहाँ में दिलों की हर बाजी 
फिर अमन चैन के खेल में अपनी हार करारी क्यों है 
देता है जो मुल्क दुनिया को पैगाम ऐ मोहब्बत 
फिर अपने मुल्क से गद्दारी की तैयारी क्यों है 
 









5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (19-03-2016) को "दुखी तू भी दुखी मैं भी" (चर्चा अंक - 2286) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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