ब्लौग सेतु....

16 जुलाई 2016

माँ मुझे गोंद में फिर आना है -- प्रभात


माँ मुझे गोंद में फिर आना है
बारिश से मुझे बचा लो
गोदी में अचरे से छुपा लो
आँखों में कजरा लगा दो
सुबह मुझे स्नान करा दो
पढ़के स्कूल से थके आना है 
माँ मुझे★★★
डांट मिली तो दुलरा दो
चम्पक दे मन बहला दो
शाम हुयी तो दूध पिला दो
चांदनी रात में कथा सुना दो 
खिलौने पाने की जिद करना है 
माँ मुझे★★★
जो मैं खाऊं वही बना दो 
बात बात में मुझे हंसा दो 
रोते हुए मुझे बहला दो
सरसों से लेपन कर दो
भूत न आये छुप जाना है
माँ मुझे★★★

माँ मुझे गोंद में फिर आना है
बारिश से मुझे बचा लो
गोदी में अचरे से छुपा लो
आँखों में कजरा लगा दो
सुबह मुझे स्नान करा दो
पढ़के स्कूल से थके आना है 
माँ मुझे★★★
डांट मिली तो दुलरा दो
चम्पक दे मन बहला दो
शाम हुयी तो दूध पिला दो
चांदनी रात में कथा सुना दो 
खिलौने पाने की जिद करना है 
माँ मुझे★★★
जो मैं खाऊं वही बना दो 
बात बात में मुझे हंसा दो 
रोते हुए मुझे बहला दो
सरसों से लेपन कर दो
भूत न आये छुप जाना है
माँ मुझे★★★



6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (17-07-2016) को "धरती पर हरियाली छाई" (चर्चा अंक-2405) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. माँ के प्रति ये सम्मोहन ये प्रेम .... माँ के उस निस्वार्थ प्रेम का प्रतिकार ही है ...
    सुन्दर रचना है ...

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    उत्तर
    1. बिकुल सही कहा आपने ....शुक्रिया

      हटाएं

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