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30 अप्रैल 2017

हम हिंदुस्तानी


राजेश त्रिपाठी

नहीं झुके हैं नहीं झुकेंगे हम वीर बलिदानी
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी।।
   वीर शहीदों के बलिदानों से हमने पायी थी आजादी।
  दिल बोझिल है, आंखें नम, देश की लख बरबादी।।
   केसर क्यारी सिसक रही धधक रहा कश्मीर है।
   भू-स्वर्ग दोजख बन बैठा सही ना जाती पीर है।।
बच्चों के हाथों में पत्थर, लख होती हैरानी।
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी।
   भेज रहा आतंक की खेपें, ऐसा है शैतान।
   पाक तो जैसे खो चुका है धर्म और ईमान।।
   देश-विरुद्ध देश के बच्चों को जो बहकाये।
  ‘ कश्मीर चाहे आजादी’ हरदम बांग लगाये।।
कश्मीरियों के लिए बहाता आंख से नकली पानी।
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तनी ।।
   भूल रहा शैतान इसने हमसे युद्ध में मुंह की खाई है।
  अपना हर जवान भगत सिंह, हर बाला लक्ष्मीबाई है।।
  घर-घर में अब्दुल हमीद हैं, जर्रे-जर्रे में बतरा हैं।
  मातृभूमि हित लुटा सकते खून का कतरा कतरा हैं।।
भारत के हित कुरबान कर चुके अपनी जो जवानी।
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी।।
   कश्मीर से कन्याकुमारी तक अपना भारत एक है।
  हिंदू, मुसलिम, सिख,ईसाई इसके सारे बंदे नेक है।।
  सबके मन में भारत है दिल में इनके तिरंगा है।
  सब धर्मों को देता आदर मेरा भारत सतरंगा है।।
कुचल डालिए इसे छेड़ने की हर इक कारस्तानी।
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी।।
   जहां हुए तुलसी, कबीर, जायसी औ रहीम रसखान।
  गंगा-जमनी तहजीब जहां , मेरी जान ये हिंदुस्तान।।
  बच्चा-बच्चा वीर है इसका घर-घर में आजाद हैं।
  इसीलिए ये देश हमारा, देखो शाद और आबाद है।।
पूरी दुनिया गाती अब तक जिसकी शौर्य कहानी।
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी।।
  आओ इस पुनीत दिवस पर हम कसम ये खायें।
  हिमालय से तन जायेंगे गर देश पर आयें बाधाएं।।
  अपना पल-पल ऋणी है इसका ये अपना आधार है।
  यह है तो हम है इससे हम सबको बेहद प्यार है।।
जो भी हमसे टकरायेगा उसको पड़ेगी मुंह की खानी।
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी ।।

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (02-05-2017) को
    सरहद पर भारी पड़े, महबूबा का प्यार; चर्चामंच 2626
    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. ओजस्वी ... जोश और जूनून से भरी देश प्रेम की लाजवाब रचना ...
    आभार साझा करने के लिए ....

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  3. आदरीय दिगंबर जी सादर नमन। धन्यवाद मेरे विचारों को पसंद करने के लिए। देश की दशा दिशा देख मन उद्वेलित होता हो कुछ भाव कविताओं में व्यक्त हो जाते हैं। अपने पास विचारों के संप्रेषण का यही तो एक साधान है। आपका आभार कि आपने इन्हें सराह कर मेरा आत्मबल बढ़या।-राजेश त्रिपाठी

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  4. शास्त्री जी प्रणाम। मेरे विचारों को एक मंच देने के लिए आपका आभार। आप जैसे सुधी व्यक्तियों के आशीष हमारे लिए सबसे बड़े प्रोत्साहन हैं। आभार।- राजेश त्रिपाठी

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  5. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व हास्य दिवस - अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  6. आदरणीय ,स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ हमें समझना होगा ! सुन्दर व प्रेरणाप्रद ,आभार। "एकलव्य"

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    1. धन्यवाद ध्रुव सिंह जी। मेरे विचारों को पसंद करने के लिए आभार।- राजेश त्रिपाठी

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