कविता मंच प्रत्येक कवि अथवा नयी पुरानी कविता का स्वागत करता है . इस ब्लॉग का उदेश्य नये कवियों को प्रोत्साहन व अच्छी कविताओं का संग्रहण करना है. यह सामूहिक
ब्लॉग है . पर, कविता उसके रचनाकार के नाम के साथ ही प्रकाशित होनी चाहिये. इस मंच का रचनाकार बनने के लिये नीचे दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें,
ब्लौग सेतु....
9 अगस्त 2026
यथार्थवादी कविता के रस-तत्त्व* +रमेशराज
7 अगस्त 2026
16 नवंबर 2022
महिला शक्ति: (लेखिका-श्रीमती अक्की वर्मा)
(श्रीमती अक्की वर्म्मण:लेखन्या:)
प्राचीनयुगात् अस्माकं समाजे स्त्रीणां विशिष्टं स्थानं वर्तते। यथा ऋग्वैदिककालेषु लोपामुद्रा, घोषा, सिकता, आपला एवं विश्वास इति विदूषी स्त्रीणां वर्णनं विद्यते। अस्मासु पौराणिक ग्रंथेषु नार्ये उक्तं च- "यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता: " ताथापि व्यंगम् इदं दृश्यताम् नारीणां सशक्तिकरणस्य आवश्यकता अनुभूयते । स्त्रीयैव मानववर्गस्य अस्तित्वः भुता इति मन्यते। सरलशब्देषु महिला सशक्तिकरणं परिभाषितं कर्त्तु शक्यते। स्वजीवने निर्णय ग्रहणस्य या शक्ति नारीषु वर्तते, तस्याः शक्ते: बोधः उपयोगश्च एका नारी कुर्यात समाजे तस्याः वास्तविक अधिकारं प्राप्ताय सक्षमनिणार्यैव महिला सशक्तिकरण अस्ति।
7 अप्रैल 2022
17 मार्च 2022
होली का एक रोमांचक संस्मरण
*संस्मरण*
होली पर शहीद ऊधम सिंह की तरह मैं भी फांसी पर लटक जाता
*रमेशराज
*********************
अपने अलीगढ़ की जन्मस्थली गांव एसी में होली के अवसर पर शहीद ऊधम सिंह पर खुद ही रचकर एक नाटक का मंचन किया।
घटना 1973 की है, तब मैं बी. ए. कर रहा था । नाटक का मंचन गांव के ही रामवीर ढुलकिया के चबूतरे पर हुआ था।
कविमित्र महेशकुमार पाठक व डॉ दिनेश कुमार पाठक के पिताश्री ने सूत्रधार की भूमिका निभाई थी। अब वे इस संसार में नहीं हैं, उन्हें नमन। मैंने शहीद ऊधम सिंह की भूमिका निभाई।महेश को क्या भूमिका मिली थी, याद नहीं आ रहा।
नाटक के अंतिम दृश्य को सजीव बनाने के लिये लोहे की गिररी पर रस्सी का फंदा बांधकर उसे एक बल्ली पर लटका दिया था। उसकी डोर गांव के चक्की वाले मुंशी जी के लड़के धर्मवीर के हाथ में थी। फांसी के दृश्य पर उस नासमझ ने रस्सी को थोड़ा खींचने के स्थान पर अधिक खींच दिया। परिणाम स्वरूप गिररी से लटकी रस्सी का फंदा इतना तन गया कि मैं जमीन से ऊपर हवा में लटक गया।
ईश्वर की कृपा इतनी रही कि जितनी तेजी से यह कार्य हुआ, उतनी ही फुर्ती से मैंने गले और रस्सी के बीच अपने हाथ फंसा लिए, फलस्वरूप रस्सी का सारा तनाव, खिंचाव मेरे हाथ झेल गए। गर्दन दवाब से मुक्त रही। अगर ऐसा न हुआ होता तो ऊधम सिंह की तरह फांसी मुझे भी लग जाती।
बचपन के मित्र महेश की याद बहुत आती है। हम दोनों की पूरे गांव में चर्चित और अमर जोड़ी थी। कोरोना के ग्रास के उपरांत मित्र की अब तो स्मृतियां ही शेष हैं।
20 फ़रवरी 2022
रमेशराज की वर्णिक छन्दों में तेवरियाँ
*रति वर्णवृत्त में तेवरी*
**********
खल हैं सखी
मल हैं सखी।
जन से करें
छल हैं सखी।
सब विष-भरे
फल हैं सखी।
सुख के कहाँ
पल हैं सखी।
नयना हुए
नल हैं सखी।
*रमेशराज
*विमोहा वर्णिक छंद में तेवरी
***********
आन को रोइए
मान को रोइए।
बारहा खो रही
शान को रोइए।
कौन दे रोटियां
दान को रोइए।
पीर को जो सुने
कान को रोइए।
चीख़ ही चीख़ हैं
गान को रोइए।
*रमेशराज
*विमोहा वर्णिक छंद में तेवरी
**********
आज ये हाल हैं
जाल ही जाल हैं।
लापता है नदी
सूखते ताल हैं।
सन्त हैं नाम के
खींचते खाल हैं।
क्या गली क्या मकां
खून से लाल हैं।
गर्दनों पे छुरी
थाप को गाल हैं।
*रमेशराज
*तेवरी ( राजभा राजभा )
**********
आपदा शारदे
ले बचा शारदे!
घोंटती है गला
ये हवा शारदे!
मातमी मातमी
है फ़िजा शारदे!
खत्म हो खत्म हो
ये निशा शारदे!
डाल पे गा उठे
कोकिला शारदे।
* रमेशराज
* रति वर्णवृत्त में रमेशराज की एक तेवरी
*******
हम हीन हैं
अति दीन हैं।
सब बस्तियां
ग़मगीन हैं।
उत जाल-से
जित मीन हैं।
चुप बाँसुरी
गुम बीन हैं।
दुःख से भरे
अब सीन हैं।
*रमेशराज
*विमोहा वर्णवर्त्त में तेवरी
**********
ज़िन्दगी लापता
रोशनी लापता।
फूल जैसी दिखे
वो खुशी लापता।
होंठ नाशाद हैं
बाँसुरी लापता।
लोग हैवान-से
आदमी लापता।
प्यार की मानिए
है नदी लापता।
*रमेशराज
*रति वर्णवृत्त में तेवरी*
**********
खल हैं सखी
मल हैं सखी।
जन से करें
छल हैं सखी।
सब विष-भरे
फल हैं सखी।
सुख के कहाँ
पल हैं सखी।
नयना दिखें
नल हैं सखी।
*रमेशराज
*।।तेवरी।।तिलका वर्णिक छंद ।।सलगा सलगा।।
**********
हर बार मिले
बस प्यार मिले।
बढ़ते दुःख का
उपचार मिले।
नित फूल खिलें
जित खार मिले।
मन के मरु को
जलधार मिले।
*रमेशराज
*विमोहा वर्णिक छंद में तेवरी ।।राजभा राजभा।।
**********
प्रेम की थाह में
आदमी डाह में।
रोशनी लापता
तीरगी राह में।
जो रहे वाह में
आज हैं आह में।
प्रेम की ये दशा
देह है चाह में।
क्या मिला सोचिए
आपको दाह में।
*रमेशराज
*।। तेवरी।। विमोहा वर्णिक छंद..राजभा राजभा
**************
आग ही आग है
बेसुरा राग है।
बस्तियां राख हैं
गाइये फ़ाग है।
खो गये हैं गुणा
भाग ही भाग है।
आह का डाह का
दंशता नाग है।
है खिजां ही खिजां
सूखता बाग है।
*रमेशराज
*।। तेवरी।। विमोहा वर्णिक छंद..राजभा राजभा
**************
आग ही आग है
बेसुरा राग है।
बस्तियां राख हैं
गाइये फ़ाग है।
खो गये हैं गुणा
भाग ही भाग है।
आह का डाह का
दंशता नाग है।
है खिजां ही खिजां
सूखता बाग है।
*रमेशराज
*तेवरी।।तिलका वर्णिक छंद।।सलगा सलगा
**********
बचना ग़म से
इस मातम से।
यह दौर बुरा
सब हैं यम-से।
अब तो रहते
नयना नम-से।
अब लोग दिखें
जग में बम-से।
हम 'गौतम' हैं
मिलना हम से।
*रमेशराज
*तेवरी ।। राजभा राजभा।।
********************
आप तो आप हैं
बॉस हैं, बाप हैं।
आप हैं तो यहाँ
पाप ही पाप हैं।
आप है बर्फ़-से
आप ही भाप हैं।
मौत के मातमी
आपसे जाप हैं।
वक़्त के गाल पे
आप ही थाप हैं।
*रमेशराज
*तेवरी ।। राजभा राजभा।।
********************
आप तो आप हैं
बॉस हैं, बाप हैं।
आप हैं तो यहाँ
पाप ही पाप हैं।
आप है बर्फ़-से
आप ही भाप हैं।
मौत के मातमी
आपसे जाप हैं।
वक़्त के गाल पे
आप ही थाप हैं।
*रमेशराज
*तिलका वर्णिक छंद में तेवरी*।सलगा सलगा।
**********
मुसकान गयी
मधुतान गयी।
अब बेघर हैं
हर शान गयी।
इतने बदले
पहचान गयी।
दुःख ही दुःख हैं
सुख-खान गयी।
तम से लड़ते
अब जान गयी।
*रमेशराज*
**तेवरी*
आप महान
सुनो श्रीमान।
पहले लूट
करो फिर दान।
माईबाप
आपसे प्रान।
आप पहाड़
गए हम जान।
गर्दभ-राग
आपकी शान।
नेता-रूप!!
धन्य भगवान।
*रमेशराज
*********
सम्पर्क-15/109, ईसानगर, अलीगढ़-उत्तर प्रदेश
10 नवंबर 2021
रमेशराज की 11 तेवरियाँ
रमेशराज की 11 तेवरियाँ
****************
1.
दोनों ही कान्हा के प्रिय हैं
मीरा हो या रसखान। नादान।।
जो निर्बल का बल बनता है
उसके वश में भगवान। नादान।।
तुझको विश्वास मुखौटों पे
सच्चाई कुछ तो जान। नादान।।
ये सम्प्रदाय का चक्कर है
तू धर्म इसे मत मान। नादान।।
पर्दे के पीछे प्रेत यही
इन देवों को पहचान। नादान।।
जो चुगलखोर है, बच उससे
रख यूँ मत कच्चे कान। नादान।।
तू द्वैत जान, अद्वैत समझ
व्रत का मतलब रमजान। नादान।।
*रमेशराज*
2.
*********
सुलझाने बैठें क्या गुत्थी
जब इसका ओर न छोर। हर ओर।।
करनी थी जिन्हें लोकरक्षा
बन बैठे आदमखोर।हर ओर।।
सड़कों पे पउआबाज़ दिखें
लम्पट-गुण्डों का शोर।हर ओर।।
सद्भावों की नदियां सूखीं
अब ग़ायब हुई हिलोर।हर ओर।।
कोयल की कूक मिले गुमसुम
नित नाचें आज न मोर।हर ओर।।
*रमेशराज*
3.
**********
छल का बल का ये दौर मगर
तू अपने नेक उसूल। मत भूल।।
वह मुस्कानों से ठग लेगा
उसके हाथों में फूल। मत भूल।।
ये जंगल ही कुछ ऐसा है
मिलने हैं अभी बबूल। मत भूल।।
कोशिश कर उलझन सुलझेगी
मिल सकता कोई टूल। मत भूल।।
करले संघर्ष, जीत निश्चित
बदले सब कुछ आमूल। मत भूल।।
*रमेशराज*
4.
*तेवरी*
**********
जो सच की खातिर ज़िन्दा है
उसका ही काम तमाम। हे राम!!
खुशियों पर नज़र जिधर डालें
हर सू है क़त्लेआम। हे राम!!
जो रखता चाह उजालों की
उसके हिस्से में शाम। हे राम!!
जिनको प्यारी थी आज़ादी
बन बैठे सभी ग़ुलाम। हे राम!!
कोई छलिया, कोई डाकू
अब किसको करें प्रणाम।हे राम!!
*रमेशराज*
5.
**********
दोनों ही कान्हा के प्रिय हैं
मीरा हो या रसखान। नादान।।
जो निर्बल का बल बनता है
उसके वश में भगवान। नादान।।
तुझको विश्वास मुखौटों पे
सच्चाई कुछ तो जान। नादान।।
ये सम्प्रदाय का चक्कर है
तू धर्म इसे मत मान। नादान।।
पर्दे के पीछे प्रेत यही
इन देवों को पहचान। नादान।।
जो चुगलखोर है, बच उससे
रख यूँ मत कच्चे कान। नादान।।
तू द्वैत जान, अद्वैत समझ
व्रत का मतलब रमजान। नादान।।
*रमेशराज*
6.
**********
बाक़ी तो साफ़-सफ़ाई है
बस पड़ी हुई है पीक।सब ठीक।।
घबरा मत नाव न डूबेगी
बस छेद हुआ बारीक।सब ठीक।।
जीना है इन्हीं हादसों में
तू मार न ऐसे कीक।सब ठीक।।
दीखेगा साँप न तुझे कभी
बस पीटे जा तू लीक।सब ठीक।।
उसपे तेरी हर उलझन का
उत्तर है यही सटीक।सब ठीक।।
*रमेशराज*
7.
*********
अबला की लाज लूटने को
रहते हैं सदा अधीर। हम वीर।।
बलशाली को नित शीश झुका
निर्बल पे साधें तीर। हम वीर।।
उस मल को निर्मल सिद्ध करें
जिस दल की खाते खीर। हम वीर।।
हम से ही ज़िन्दा भीड़तंत्र
सज्जन को देते पीर। हम वीर।।
गरियाने को कविता मानें
हैं ऐसे ग़ालिब-मीर। हम वीर।।
जिस बस्ती में सद्भाव दिखे
झट उसको डालें चीर। हम वीर।।
तुम ठाठ-बाट पे मत जाओ
अपना है नाम फ़कीर। हम वीर।।
*रमेशराज*
8.
**********
तब ही क़िस्मत तेरी बदले
जब रहे हौसला संग। लड़ जंग।।
आनन्द छंद मकरंद लुटे
सब दीख रहा है भंग। लड़ जंग।।
कुछ तो सचेत हो जा प्यारे
वर्ना जीवन बदरंग। लड़ जंग।।
रणकौशल को मत भूल अरे
इतना भी नहीं अपंग। लड़ जंग।।
फिर तोड़ भगीरथ हर पत्थर
तुझको लानी है गंग। लड़ जंग।।
*रमेशराज*
9.
*तेवरी*
*********
जिसमें दिखती हो स्पर्धा
अच्छी है ऐसी होड़। मत छोड़।।
नफ़रत के बदले प्रेम बढ़ा
बिखरे रिश्तों को जोड़। मत छोड़।।
गद्दार वतन में जितने हैं
नीबू-सा उन्हें निचोड़। मत छोड़।।
अति कर बैठे हैं व्यभिचारी
हर घड़ा पाप का फोड़।मत छोड़।।
चलना है नंगे पांव तुझे
जितने काँटे हैं तोड़।मत छोड़।।
वर्ना ये कष्ट बहुत देगा
पापी की बाँह मरोड़।मत छोड़।।
*रमेशराज*
10.
*तेवरी*
**********
कल तेरी जीत सुनिश्चित है
रहना होगा तैयार। मत हार।।
माना तूफ़ां में नाव फँसी
नदिया करनी है पार।मत हार।
इस तीखेपन को क़ायम रख
हारेगा हर गद्दार। मत हार।।
पापी के सम्मुख इतना कर
रख आँखों में अंगार। मत हार।।
तू ईसा है-गुरु नानक है
तू सच का है अवतार। मत हार।।
होता है अक्सर होता है
जीवन का मतलब ख़ार। मत हार।।
साहस को थोड़ा ज़िन्दा रख
पैने कर ले औजार। मत हार।।
दीपक-सा जलकर देख ज़रा
ये भागेगा अँधियार। मत हार।।
*रमेशराज*
11.
*********
तूफ़ां के आगे फिर तूफ़ां
ये नाव न जानी पार। इसबार।।
जीते ठग चोर जेबकतरे
हम गए बाजियां हार।इसबार।।
हर तीर वक्ष पर सहने को
रहना होगा तैयार।इसबार।।
उसका निज़ाम है चीखो मत
वर्ना पड़नी है मार।इसबार।।
ये खत्म नहीं होगी पीड़ा
कर चाहे जो उपचार।इसबार।।
मिलने तुझको अब तो तय है
फूलों के बदले खार।इसबार।
तूने सरपंच बनाये जो
निकले सारे गद्दार।इसबार।।
परिवर्तन वाले सोचों की
पैनी कर प्यारे धार। इसबार।।
*रमेशराज*
9 जनवरी 2021
टेलीग्राम पर हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिये गूंज शब्दों की....समुह का शुभ-आरंभ......
25 सितंबर 2020
उड़ान ...श्वेता सिन्हा

24 अगस्त 2020
Bhai Chara / भाईचारा / Brother Hood

Bhai Chara / भाईचारा / Brother Hood
Bhai Chara / भाईचारा / Brother Hood
क्या गजब है देशप्रेम,क्या स्वर्णिम इतिहास हमारा है|अजब-गजब कि मिलती मिसालें,क्या अद्भुत भाईचारा है||
जब भी दुश्मन आता सरहद पर,हमें देशप्रेम बुलाता है|माँ भारती कि आन-बान को,हर भारतवासी मर-मिट जाता है||
जब सैनिक भारत माँ कि रक्षा को,सीने पर गोली खाता है|हर भारतवासी के सीने को,वो लहूलुहान कर जाता है||
जब जब आई है विपदा हम पर,हम कंधे से कंधा मिलाते है|हम भारत माँ और उन वीर सपूतो के,वंदन को शीश झुकाते है||
वीर सपूतो के बलिदानों पर,हर भारत वासी हारा है|हम माँ भारती कि संताने है,और हिंदुस्तान हमारा है||क्या अद्भुत भाईचारा है||
ऋषभ शुक्ला
Hindi Kavita Manch / हिंदी कविता मंच
आप मेरी कविताओं को अगर पढ़ना चाहे तो नीचे लिंक पर जाकर मेरे ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं|Hindi Kavita Manch /हिन्दी कविता मंच - https://hindikavitamanch.blogspot.com/मेरी कहानियों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें|Mere Man Kee / मेरे मन की - https://meremankee.blogspot.com/मेरे यात्रा से संबंधित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें|Ghumakkadi Dil Se / घुमक्कड़ी दिल से - https://theshuklajee.blogspot.com/Facebook / फेसबुक - https://instagram.com/theshuklajeeInstagram / इंस्टाग्राम - https://www.facebook.com/theshuklajiiTwitter / ट्विटर - https://twitter.com/theshuklajeeYoutube / यूट्यूब - https://www.youtube.com/channel/MereManKeeContact Us / संपर्क करें - rushabhshukla8@gmail.comआपका ब्लॉग पर आने के लिए आभार, हमारे मार्गदर्शन हेतु पुनः पधारें | क्योकी आपके आगमन से ही हमारे लेखन में उत्साह की वृद्धी होती है | धन्यवाद |
28 अप्रैल 2020
Youtube पर गूंज शब्दों की चैनल का शुभारंभ।
आप सभी को बताते हुए हर्ष हो रहा है कि दिनांक 30 अपरैल 2020 से Youtube पर गूंज शब्दों की चैनल का शुभारंभ हो रहा है। इस चैनल पर हिन्दी साहित्य के प्रमुख रचनाकार एव कवियो कि अनमोल कृतियों को उनकी आवाज के साथ संकलन करने का प्रयास किया जा रहा है
अगर आप भी अपनी रचना को इस चैनल का हिस्सा बनाना चाहते हैं तो आप अपनी रचना का विडिओ संक्षिप्त भूमिका के साथ निम्न ईमेल
goonjshabdonki@gmail.com
पर भेजें। रचना Google Drive अथुवा अन्य किसी शेयरिंग माध्यम पर अपलोड करके भी भेजी जा सकती है।
1 रचना के लिये किसी प्रकार का शुल्क नहीं दिया जाएगा। इसका एकमात्र उदेश्य हिंदी का प्रचार प्रसार तथा हिंदी प्रेमियों को ध्वनीांकित तथा विडिओ सामग्री उपलब्ध कराना है।
2 इस चैनल पर साहित्य की सभी विधाओं कहानी कविता लेख आदि का स्वागत है। साथ ही किसी रचनाकार द्वारा पूर्व में कवि गोष्ठियों अथुवा संमेलन में दी गयी प्रस्तुति भी भेजी जा सकती है। ध्यान रहे कि जो प्रस्तुति आप भेज रहे हैं, संबंधित गोष्ठियों व संमेलनोंके आयोजकों को उस प्रस्तुति को हमारे चैनल पर अपलोड किये जाने पर किसी प्रकार की आपत्ती न हो। साथ ही वो रचना Youtube पर पहले से न हो।
3 रचना के विडिओ व औडिओ की गुणवता पर विशेष ध्यान दें। रचना आप के नाम के साथ ही पोस्ट की जाएगी।
4 आप चाहें तो हिंदी के पुराने रचनाकारों की रचनाओं को भी अपनी आवाज में विडिओ रिकार्डिंग करके हमे भेज सकते हैं।
हमे पूरा विश्वास है कि आप इस चैनल के लिये अधिक से अधिक रचनाएं भेजकर हमे सहियोग देंगे।
अधिक जानकारी के लिये निम्न ईमेल पर संपर्क करें।
goonjshabdonki@gmail.com





















































































