ब्लौग सेतु....

15 जनवरी 2018

आंख में आंसू भर—भर आये....सुदेश यादव जख्मी


वो  हमको   ऐसा  बिसराये,  सावन   में
आंख में आंसू भर—भर आये, सावन में

बिजली  चमके  बादल  गरजे,  डर जाउं
रिमझिम मन में प्यास जगाये,सावन में

खिलते  फूल  महकती कलियां, न भायें
पुरवा   बैरन  आग  लगाये ,सावन   में

इतना  हरजाई  निकलेगा,  सनम मेरा
इश्क  किया  करके  पछताये, सावन में

पिछले खत पढ—पढ के ये दिल,रोता है
अब  विरहन से  सहा  न जाये, सावन में

क्या  लेना  दुनियां  से मुझको, बिन तेरे
दिलकश  ये  मौसम  न  भाये, सावन में

नहीं  गिला, शिकवा  हमको, बेगानों से
जख्मी  ने  ही  जख्म  लगाये,सावन में

        -सुदेश यादव जख्मी
    कवि, साहित्यकार

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 16 जनवरी 2018 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (16-01-2018) को "सारे भोंपू बेंच दे, यदि यह हिंदुस्तान" (चर्चामंच 2850) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!

    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. वाह!!!
    बहुत सुन्दर, लाजवाब....

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  4. बहुत ख़ूबसूरत रचना ... भावपूर्ण

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