मन-मृदंग बजा जा
सजनी ....
मैं मयूर बन
करूँगा नर्तन
होगा तन-मन
सावन-सावन
उमड़-घुमड़कर बन
घटा सी
रिमझिम करती छा
जा सजनी
सरगम बनकर आजा
सजनी
मन-मृदंग बजा जा
सजनी ....
कह ले अपनी, सुन ले मेरी
सुख-सपनें या पीर
घनेरी
बाँटेंगे मिलकर
के दोनों
हाल-ए-दिल सुना
जा सजनी
सरगम बनकर आजा
सजनी
मन-मृदंग बजा जा
सजनी ....
मैं आवारा बादल
जैसा
फिरूँ भटकता पागल
जैसा
एक ठिकाना दे-दे
मुझको
घर-अँगना बसा जा
सजनी
सरगम बनकर आजा
सजनी
मन-मृदंग बजा जा
सजनी ....
फूलों की माला-सा
जीवन
इमरत-सा, हाला-सा जीवन
जो कुछ है, होने से तेरे
होजा मेरी, ना जा सजनी
सरगम बनकर आजा
सजनी
मन-मृदंग बजा जा
सजनी ....
-© के.एल. स्वामी ‘केशव’
