ब्लौग सेतु....

26 मई 2014

युग नया


युग नया जो आया संदेश दे रहा है

युग नया जो आया संदेश दे रहा है।
दुख के दिन बीते, देश बढ़ रहा है।।
अच्छे दिन तो जैसे आ ही गये हैं।
मोदी युग-नायक से छा ही गये हैं।।
      सपनों को अब मिल गयी हैं राहें।
      खुल गयीं हैं विकास की भी बाहें।।
      हर दिशा में अब नव उल्लास होगा।
      अब तो हर पल बस विकास होगा।।

दुनिया के सारे नेता साक्षी बने हैं।
सेवक मोदी देश नायक जो बने हैं।।
वे देश की दशा को संवारने चले हैं।
जानते हैं दुख, गरीबी में जो पले हैं।।
हे जगत के नियंता तुम साथ-साथ रहना।
बदले भारत- भाग्य इतना करम तो करना।।
सदियों से दुख भोगा,शोषित रहे जो वंचित।
उनको न तोड़ना, सपने जो इनके संचित।।
आसेतु हिमालय, ये देश खिल गया है।
सच्चा देश नायक, उसे मिल गया है।।
उनको है भरोसा वह कर दिखायेगा।
इस देश में वह रामराज्य लायेगा।।
दृढ़प्रतिज्ञ है वह, इरादे का अटल है।
नजर में उसकी अब विश्व पटल है।।
दुनिया में फिर भारत का मान होगा।
उसकी प्रतिभा का फिर सम्मान होगा।।
प्राची में उग गया है नवल नव दिवाकर।
समता के प्रकाश से भर जायेगा घऱ-घर।।
मोदी है जिसका नाम, है सच्चा सिपाही।
उसका हर इक कदम दे रहा है गवाही।।
संस्कृति का हामी, भारत मां की संतान है।
वाणी में है भारत, सांसों में हिंदोस्तान है।।
विष-बोल उसने झेले, अविचल रहा हमेशा।
क्या आपने कभी हिम्मती है देखा ऐसा।।
मुदित होगा भारत मोदी जो आ गये हैं।
हर दिल में बन उम्मीद जो छा गये हैं।।
बस यही है प्रार्थना प्रभु आप साथ देना।
पुण्यभूमि भारत को गौरव उसका देना।।
                  -राजेश त्रिपाठी





     



12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (27-05-2014) को "ग्रहण करूँगा शपथ" (चर्चा मंच-1625) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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    उत्तर
    1. धन्यवाद, आभार शास्त्री जी। इसी तरह आशीर्वाद बनाये रखिएगा।

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  2. उत्तर
    1. प्रसाद जी आपका आभार। ऐसे ही बनाये रखिएगा प्यार। आपके प्रोत्साहन हैं बड़ा संबल। य़े देते हैं नया कुछ लिखने का बल।

      हटाएं
  3. नयी पुरानी हलचल का प्रयास है कि इस सुंदर रचना को अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    जिससे रचना का संदेश सभी तक पहुंचे... इसी लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 29/05/2014 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है...हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...

    [चर्चाकार का नैतिक करतव्य है कि किसी की रचना लिंक करने से पूर्व वह उस रचना के रचनाकार को इस की सूचना अवश्य दे...]
    सादर...
    चर्चाकार कुलदीप ठाकुर
    क्या आप एक मंच के सदस्य नहीं है? आज ही सबसक्राइब करें, हिंदी साहित्य का एकमंच..
    इस के लिये ईमेल करें...
    ekmanch+subscribe@googlegroups.com पर...जुड़ जाईये... एक मंच से...

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    उत्तर
    1. कुलदीप जी नमस्कार। ये तो है आपका प्यार। आपका यह प्रोत्साहन हमारा हौसला बढ़ता है।

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  4. उत्तर
    1. वाणभट्ट जी नमस्कार। मेरे विचारों को सराहने के लिए आभार।

      हटाएं
  5. उत्तर
    1. धन्यवाद भास्कर जी। मेरे विचार आपको भाये।

      हटाएं
  6. उत्तर
    1. आशा जी आपको धन्यवाद। आपकी सराहना के लिए आभार। इससे हमारा उत्साह बढ़ता है।

      हटाएं

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