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18 मई 2014

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निजामे हिंद को मोदी जो मिल गया
इक शख्श फर्श से यों अर्श तक है तन गया।
सूरमा थे जितने अर्श के बौना वो कर गया।।
कीचड़ जहां दुश्मनों की तरफ से उछाले गये।
वो सभी उसके लिए बन कमल हैं खिल गये।।
हिंद को अब शासक नहीं सेवक है मिल गया।
ताब जिसकी देख  हर दुश्मन है हिल गया।।
मुद्दत के बाद इक सच्चा रहबर है मिल गया।
निजामे हिंद को आला मोदी जो मिल गया।।
माना कि राह में कांटे हैं, हैं दुश्वारियां भी हैं।
कच्चा नहीं खिलाड़ी, इधऱ तैयारियां भी हैं।।
अब कारवां तरक्की फिर  से रवां दवां होगा।
जुल्मो-सितम का आलम, हिंद से हवा होगा।।
सब यही सोचते हैं कि, अब क्या, कैसा होगा।
बदतर नहीं, अब जो भी होगा बेहतर होगा।।
आओ खैरमकदम करें उनके अब आने का।
अब तो खत्म हो दौर, गम के फसाने का।।
युग नया जो लाया है,उसे यह एहसास है।
उस पर अवामे हिंद ने किया विश्वास है।।
वह उनकी उम्मीदों को नयी  जान देगा।
यकीं हैं हिंद को आला पहचान भी देगा।।
इंसां है इरादों में अटल, कर दिखायेगा।
लगता है देश में वो रामराज्य लायेगा।।
अब न जाति-भेद से कोई उदास होगा।
हर सिम्त अब तो  बस विकास होगा।।
पूरे होंगे अब सभी जिनके जो भी ख्वाब हैं।
अरसे के बाद मुल्क में हुआ सही इंतिखाब है।।
मां का लिया आशीष, अभय वरदान मिल गया।
मुसकाया हिंदुस्तान हर इक का दिल खिल गया।।

         -राजेश त्रिपाठी

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (19-05-2014) को "मिलेगा सम्मान देख लेना" (चर्चा मंच-1617) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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    उत्तर
    1. शास्त्री जी धन्यवाद। मेरे विचार आपको भाये इसके लिए आभार।

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  2. उत्तर
    1. शुक्ला जी धन्यवाद और आभार। यह तो है आपका प्यार।

      हटाएं

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