ब्लौग सेतु....

12 सितंबर 2014

किस कदर गिर गया इनसान देखिए

 राजेश त्रिपाठी 
 किस कदर गिर गया है अब इनसान देखिए।
रिश्तों की कद्र नहीं, पैसे की पहचान देखिए।।

सारे उसूल, अब सारी रवायत दफन हुई।
दर-दर है बिक रहा अब ईमान देखिए।।

पैसा ही आज सब है, ये माई-बाप है।
पैसा जैसे चलाये, चल रहा इनसान देखिए।।

कुछ लोग ऊंचे ओहदों पर बैठ यों ऐंठ रहे हैं।
 खुद को वो समझते हैं, धरती का भगवान देखिए।।

बेटे को पढ़ा-लिखा काबिल बना दिया।
वृद्धाश्रम में पल रहे वे मां-बाप देखिए।।

वो दिन-रात तरक्की का ढोल पीट रहे हैं।
भूखा सो रहा आधा हिंदोस्तान देखिए।।

हम क्या कहें किस तरह मुल्क के हालात हो रहे।
हर तरफ हैं अब तूफानों के इमकान देखिए।।

हर गली, हर गांव, हर शहर में खौफ का साया।
कितने मुश्किलों में घिर गयी अब जान देखिए।।

'मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना' भूल गये हैं।
मजहब के नाम पर उठ रहे हैं कितने तूफान देखिए।।

इस कदर चलता रहा गर ये हंगामा मुसलसल।
फिर टुकड़ों में न बंट जाये हिंदोस्तान देखिए।।

वो जिनको प्यार है इस मुल्क, इनसानियत से।
वे चेत जायें वरना होंगे वे भी परेशान देखिए।।

आदम की जात पहले इतनी खूंखार नहीं थी।
क्या हो गया अब हर हाथ में हैं हथियार देखिए।।

वो दिन गये जब दिलों में मोहब्बत का ठौर था।
अब बस नफरत, नफरत, नफत का है राज देखिए।।

हो सके तो इनसानियत की हिफाजत करे कोई।
अब तो दुनिया में है स्वार्थ का व्यवहार देखिए।।

इस कदर शक और खौफ का आलम रवां-दवां।
उठ गया है सब पर से अब ऐतबार देखिए।।

कुछ इस कदर हैं हालात आज दुनिया के ।
डर है कभी हमसाया ही न कर दे वार देखिए।

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (13-09-2014) को "सपनों में जी कर क्या होगा " (चर्चा मंच 1735) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 15/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुरसुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 15/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

    उत्तर देंहटाएं
  3. पैसा बोलता है ..
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  4. आधुनिकता का कौरा सच
    ऊम्दा रचना

    रंगरूट

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