ब्लौग सेतु....

23 सितंबर 2014

मेरे शब्द -- शिवानी गौर

मेरे शब्द ,
अब
मुझसे भी कुछ नहीं कहते ,
चुप से खड़े हैं
परछाईयाँ थामे ,
कर दिया है
उनका श्राद्ध ,

प्रेम के मन्त्रों ने

 शिवानी गौर जी की कलम से निकली कुछ पंक्तियाँ


8 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 25/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 25-9-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1747 में दिया गया है
    आभार

    उत्तर देंहटाएं

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