ब्लौग सेतु....

26 सितंबर 2014

भीगे शब्द -- शिवनाथ कुमार


भीगे गीले शब्द 
जिन्हें मैं छोड़ चुका था 
हर रिश्ते नाते 
जिनसे मैं तोड़ चुका था

सोचा था कि
अब नहीं आऊँगा उनके हाथ 
पर आज महफ़िल जमाए बैठा हूँ 
फिर से 
भीगी रात में 
उन्हीं भीगे शब्दों के साथ.... !!



8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (27-09-2014) को "अहसास--शब्दों की लडी में" (चर्चा मंच 1749) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    शारदेय नवरात्रों की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 29/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

    उत्तर देंहटाएं
  3. धन्यवाद संजय जी मेरी रचना को कविता मंच पर स्थान देने के लिए !
    आभार ! :)

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  4. वाह ....बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

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