ब्लौग सेतु....

2 नवंबर 2015

मैं कहना चाहता हूं------कुल दीप ठाकुर

मैं कहना चाहता हूं, इक बातदिवाने से,
कुछ भी हासिल न होगा, व्यर्थ में आँसु बहाने से।
उसे तुझ से प्यार होता, तेरा जीवन तबाह न करति,
पत्थर दिल नहीं पिघलते, किसी के रोने और  मिट जाने से।
सूख रहा है एक गुल, बुलबुल की याद में,
हस्ति तेरी मिट जायेगी, गुल तेरे मुर्झाने से।
शमा को तुझसे प्यार नहीं, मत जा तु उसके पास।
जलाकर राख कर देगा, कहता हूँ परवाने से।
भोली भाली एक चकोरी, चाँद को पाना चाहाति है,
दिल नहीं है चाँद के पास, क्या लाभ है उसे चाहने से।
किसी को भी इतना मत चाहो, जी न पाओ उसके बिना,
जीवन नहीं मरा करता है, किसी के दूर जाने से।

5 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर .............मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन की प्रतीक्षा |

    http://hindikavitamanch.blogspot.in/

    http://kahaniyadilse.blogspot.in/

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 03 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  3. किसी को भी इतना मत चाहो, जी न पाओ उसके बिना,
    जीवन नहीं मरा करता है, किसी के दूर जाने से।
    ...सच कहीं न कहीं इंसान को अकेले ही जीना पड़ता है भले ही सब साथ हों ....
    बहुत बढ़िया ..

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (03-11-2015) को "काश हम भी सम्मान लौटा पाते" (चर्चा अंक 2149) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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