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11 फ़रवरी 2016

हिन्द के वीर

                                                                                       

हिन्द  धरा  है  परम वीरों  की 
करूँ   मैं  नमन  बारम्बार 
वतन के हित  में  जो बलि हुए 
वो  भारत के हैं  अमूल्य  उपहार 
हैं  वो  बड़े   भाग्यशाली 
जो  वतन के लिए  जान   गवांते 
नहीं मिलता ऐसा  नसीब  सबको 
सही में वो माटी का क़र्ज़  चुकाते 
उनकी पावन चिता की राख को 
आओ  निज  शीश  धरे  हम 
उनके   बलिदान  को  याद  कर  
 अश्रूं  संग  नयन  भरे  हम 
हिन्द  इतिहास  भरा  है वीरों से 
माटी  इसकी  चांदी  -सोना  है   
बहुत  हुआ अब और  नहीं सहेंगे 
अब कोई वीर हमें नहीं  खोना  है 
जब राजनीती होती वीरों के बलिदान पर 
हर  देशभक्त  का  मन  है  रोता 
निज  स्वार्थ  का  चोला  पहने 
हमदर्दी  दिखाते  हैं   कुछ  राजनेता 
वे  हैं  मतलबी और देशद्रोही   नेता  
है  उनको   बारम्बार  धिक्कार 
आओ सब मिलकर इनको सबक सिखाये  
 ये है भारतमाता  की करुण   पुकार 
जागो जागो ! अब तो हिन्द के वासियो 
धरम,जाति की बेड़ियों को अब तोडना है 
देश द्रोह की भाषा बोलने वालो का 
गर्व भरा मस्तिक अब हमें फोड़ना है 

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना । नमन शहीदों को ।
    लांसनायक हनुमनत्थप्पा को सादर श्रद्धांजलि ।

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