ब्लौग सेतु....

23 अक्तूबर 2017

ख़्यालों का सफ़र




अल्फ़ाज़ है कुछ माज़ी के 
दिल कभी भूलता ही नहीं
नये-पुराने घाव भर गए सारे  
दर्द-ओ-ग़म राह ढूँढ़ता ही नहीं। 



उम्र भर साथ चलने का वादा है 
अभी से लड़खड़ा गए हो क्यों ?
प्यास बुझती कहां है इश्क़ में 
साहिल पे आज आ गए हो क्यों ?



गर  न  हों  फ़ासले  दिल में   
तो दूरियों की परवाह किसे
नग़मा-ऐ-वफ़ा गुनगुनाती हो धड़कन
तो सानेहों की परवाह किसे। 



छूकर फूल को महसूस हुआ 
हाथ आपका जैसे छुआ हो 
रूह यों जगमग रौशन हुई
ज्यों रात से सबेरा हुआ हो। 

#रवीन्द्र सिंह यादव     

शब्दार्थ / WORD MEANINGS 
अल्फ़ाज़ = शब्द, शब्द समूह  ( लफ़्ज़ का बहुवचन ) / WORDS 

माज़ी = अतीत ,भूतकाल / PAST 

दर्द-ओ-ग़म= दर्द और ग़म / PAIN AND SORROW 

साहिल =समुद्री किनारा / SEA SHORE ,COAST  

फ़ासले = दूरी / DISTANCE 

सानेहों = त्रासदी (त्रासदियों ) / TRAGEDIES 

रूह= आत्मा / SOUL ,SPIRIT 

4 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. हार्दिक आभार आपका मनोबल बढ़ाने के लिए।

      हटाएं
  2. दिनांक 24/10/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  3. हार्दिक आभार कुलदीप जी रचना को मान देने के लिए।

    उत्तर देंहटाएं

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