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22 जनवरी 2016

बहुत परेशान है मेरी कविता -- संजय भास्कर

( चित्र - गूगल से साभार )
बहुत परेशान है मेरी कविता
कुछ सच्ची कुछ झूठी है मेरी कविता !!

कोशिश करता हूँ लिखू कठिन शब्दों में
पर बहुत ही सरल शब्दों में है मेरी कविता  !!

लिखना चाहता हूँ हमेशा बड़ी कविता
पर अक्सर छोटी ही रह जाती है मेरी कविता !!

जो शब्द,लफ्ज विचार आते है मन में लिख देता हूँ
इन सब को मिला कर तैयार हुई है मेरी कविता  !!

दर्द के लम्हो को लिख दिया कागज पर
तभी तो बहुत परेशान है मेरी कविता  !!

- संजय भास्कर

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (23-01-2016) को "विषाद की छाया में" (चर्चा अंक-2230) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. वाह....
    क्यों परेशान है ये कविता
    सच्चे झूठे की शान है कविता
    सादर

    उत्तर देंहटाएं

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