ब्लौग सेतु....

31 जनवरी 2016

हिमालय ताज तेरा बना....राजेश्वरी जोशी


माँ भारती,माँ भारती,
हम सब उतारे तेरी आरती|
हिमालय ताज तेरा बना,
माथे पे तेरे सज रहा|
सागर नतमस्तक हुआ,
पाँवो को तेरे धो रहा|
बाहों सी पर्वत श्रृंखलाएँ,
सौंदर्य तेरा निखारती|
माँ भारती ,माँ भारती,
हम सब उतारे तेरी आरती|

नदियाँ यहाँ कल-कल करे,
हवाएँ खेतो में झूमती|
गेहूँ की बाली झूमर करे,
पेड़ो पर कोयल कूकती|
तू ही तो है हमारे,
देश को सँवारती|
माँ भारती,माँ भारती,
हम सब उतारे तेरी आरती|

सिंह पर आरूढ़ हो माँ,
तिरंगा हाथों में धारती|
अपनी एक हुंकार से माँ,
दुश्मनों को है संहारती|
तू ही तो हे माँ हमें,
कष्टो से है निवारती|
माँ भारती,माँ भारती,
हम सब उतारे तेरी आरती|


-राजेश्वरी जोशी
उत्तराखंड,भारत

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (01-02-2016) को "छद्म आधुनिकता" (चर्चा अंक-2239) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं

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