ब्लौग सेतु....

21 जनवरी 2017

विधा - गीत--रचनाकार:- संतोष तनहा

प्रत्येक पंक्ति की मापनी - 16 मात्रा के पदपादाकुलक/राधेश्यामी छंद पर आधारित

* तुकांत विधान-
मुखड़े का तुकांत- आद सखे
* पूरक पंक्तियों का तुकांत
प्रथम अंतरे का तुकांत- ऊरी कैसी/ आऊँ कैसे/आव नहीं है।
द्वितीय अंतरे का तुकांत-आच रहे क्यों/आता क्या है/आरी कैसी।
तीसरे अंतरे का तुकांत- आया रहती है/आंटे क्यों है/ऊखा कैसे।
-------------------------------------------------

आये जब तेरी याद सखे
मन पर छाये उन्माद सखे।

अपनों से ये दूरी कैसी
रिश्तों कि मजबूरी कैसी
मैं गीत नया गाऊँ कैसे
मैं शब्द नया लाऊँ कैसे
कोई मन में दुर्भाव नहीं
उर में भी कपट-दुराव नहीं
तो आखिर बोल रहा है क्यों
मन के भीतर अवसाद सखे।
आये जब.......................।।

नैनन मोती क्यों नाच रहे
उर की पोथी क्यों बांच रहे
इन दोनों का नाता क्या है
ये आँसू फिर खाता क्या है।
इनकी ये लाचारी कैसी
दामन छोड़े यारी कैसी ,
दाखिल करता हूँ आज अभी
तेरे दर मैं परिवाद सखे ।।
आये तेरी......................।।

मन में ही माया रहती है
तरुवर सँग छाया रहती है,
दुनिया इनको छाँटे क्यों है
एक-दूजे को बाँटे क्यों है।
ये सोचें तरु भूखा कैसे
अरु साये बिन सूखा कैसे,
मैं इनको पानी देता हूँ
दे  जाओ तुम भी खाद सखे ll
आये जब...................।।


3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 22 जनवरी 2017को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर शब्द रचना
    http://savanxxx.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं

स्वागत है आप का इस ब्लौग पर, ये रचना कैसी लगी? टिप्पणी द्वारा अवगत कराएं...