ब्लौग सेतु....

1 जनवरी 2017

मुहब्बत इक इबादत

ये जो तेरे दिल में उनकी मोहब्बत है
ये तेरे मेहबूब की इक अमानत  है 
जिसकी हर एक सांस है तेरे खातिर 
ये भी खुदा की इक बड़ी इबादात है 
 
दर्द ए दिल को जुबान पर ख़तम कर 
अगर तेरे दिल में उनकी शिकायत है 
मेहबूब की मुहब्बत को खुदा मान  
अगर जिन्दा तेरे अंदर कुछ शराफत है 
कद्र है उनके दिल में तेरी मुहब्बत  की 
ये मेहबूब की तेरे ऊपर इनायत है 
दिल से दिल का सौदा सस्ता नहीं हितेश 
पल पल इमितहान इश्क की आदत है 
हितेश कुमार शर्मा 

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 02 जनवरी 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. सुन्दर शब्द रचना
    नव वर्ष की मंगलकामनाएं
    http://savanxxx.blogspot.in

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