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18 जून 2017

हाथ पब्लिक ने जोड़े....अल्हड़ बीकानेरी

सादर अभिवादन
अल्हड बीकानेरी अपनी अलग तरह की शायरी के लिए जाने जाते है आपका मूल नाम श्यामलाल शर्मा है आपको हरियाणा गौरव पुरस्कार, काका हाथरसी पुरस्कार भी मिला है | और आपको 1996 में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया | उनकी पुण्यतिथि के मौके पर उनकी यह ग़ज़ल पेश है आशा है आपको पसंद आएगी |
17 मई 1937 - 17 जून 2009

लफ़्ज़ तोड़े मरोड़े ग़ज़ल हो गई
सर रदीफ़ों के फोड़े ग़ज़ल हो गई

लीद करके अदीबों की महफि़ल में कल
हिनहिनाए जो घोड़े ग़ज़ल हो गई

ले के माइक गधा इक लगा रेंकने
हाथ पब्लिक ने जोड़े गज़ल हो गई

पंख चींटी के निकले बनी शाइरा
आन लिपटे मकोड़े ग़ज़ल हो गई 

1 टिप्पणी:

  1. वाह हास्य और व्यंग की धार लिए सुन्दर ग़ज़ल ... नमन है ...

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