ब्लौग सेतु....

19 अक्तूबर 2016

खाली काग़ज़- तूलिका शर्मा

सारी रात.......
शब्द बुने...अर्थ गढ़े
दिन के उजाले मे
कुछ मानी तलाशे
और फिर.....
शाम की हथेली पर
बस खाली काग़ज़ रख दिया
....................
क्या वो नज़र
पढ़ पाएगी ये अफ़साना ?

लेखक परिचय - तूलिका शर्मा 


3 टिप्‍पणियां:

  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 20/10/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही कमाल के शब्द ... कोरा कागज़ पढने वाले अक्सर नज़रों को पढ़ के समझ लेते हैं ...

    उत्तर देंहटाएं

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