ब्लौग सेतु....

31 अक्तूबर 2016

"फिर मिलते हैं'

लम्बी खामोशी के बाद
एक दिन आवाज आई
“चलो फिर मिलते हैं’
तीर सी सिहरन
समूचे वजूद को सिहरा गई
कुछ देर की चुप्पी
और अन्तस् से एक आवाज उभरी
ऐसा है - “वक्त गुजर गया”
अब की बार नही
अगली  बार मिलेंगे
बहुत काम बाकी हैं
जो हमारे साझी थे
कुछ मेरे और कुछ तुम्हारे
तुम्हारे पास शायद फुर्सत है
कुछ पुनरावलोकन कर लो
अगली बार ऐसा करना
मेरे और तुम्हारे काम साझा करना
अगर उसने चाहा तो
तो एक बार और सही
“चलो फिर मिलते हैं .”

XXXXX

6 टिप्‍पणियां:

  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 01/11/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. तुम्हारे पास शायद फुर्सत है
    कुछ पुनरावलोकन कर लो
    -बिलकुल सही.

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  3. बहुत बढ़िया... शुभकामनाएँ दिवाली की!

    उत्तर देंहटाएं
  4. आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएँ .

    उत्तर देंहटाएं

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